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बजट से बैंकिंग इंडस्ट्री को क्या चाहिए!

बजट से पीएसयू बैंकों में एफआईआई सीमा 20 फीसदी से आगे बढ़ाई जानी चाहिए।
अपडेटेड Feb 26, 2016 पर 14:50  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एसबीआई के चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य का कहना है कि एसडीआर का मामला नया है। बैंकों को और ताकत देने के लिए एसडीआर के नियमों में बदलाव किया है और आरबीआई ने बैंक को एसडीआर के लिए 51 फीसदी बेचने की शर्त से मुक्ति मिल गई है और अब 51 फीसदी की बजाय 26 फीसदी बेचना काफी रहेगा। इस तरह बैंकों को कुछ पूंजी मिलने में आसानी होगी।


बैंकों को विलफुल डिफॉल्टर्स के मामले में और सख्त होना पड़ रहा है क्योंकि बैंकों का पैसा वापस नहीं आ पा रहा है। विजय माल्या के यूएसएस से निकलने के बावजूद एसबीआई को अपनी पूंजी वापस हासिल करने में दिक्कत नहीं होगी।


बजट से क्या उम्मीदें हैं इस पर अरुंधति भट्टाचार्य का कहना है कि बजट में स्ट्रेस्ड एसेट्स के बारे में क्या हो सकता है इस पर बाजार की नजर रहेगी। साथ ही एनआईआईएफ को लेकर स्पष्टता आनी जरूरी है। विदेशी निवेश से पूंजी प्रवाह बढ़ने से और कैशलेस ट्रांजेक्शन होने से बैंकों के ऊपर काम का बोझ कम होगा और टैक्स का दायरा बढ़ाने से भी मदद मिलेगी। पीएसयू बैंकों में एफआईआई सीमा 20 फीसदी से आगे बढ़ाई जानी चाहिए। वहीं लोना ना चुकाने वाली कंपनी को डिफॉल्टर घोषित करना आसान होना चाहिए और छोटी बचत स्कीमों की ब्याज दरों में बदलाव किया जाना चाहिए।


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