Budget 2019: बाजार दिग्गजों और विपक्ष की प्रतिक्रिया

इस बजट को कांग्रेस ने नई बोतल में पुरानी शराब बताया है।
अपडेटेड Jul 05, 2019 पर 18:12  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आज बजट में भारत को विकास का पावरहाउस बनाने का मंत्र रखा गया। निर्मला सीतारामन जब बजट स्पीच के लिए खड़ी हुईं तो उन्होंने शुरुआत में ही चाणक्य नीति और एक उर्दू शायरी बोलकर जता दिया कि बजट में उनका पूरा जोर न्यू इंडिया और भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी के सपनों को साकार करने पर होगा। बजट भाषण जैसे जैसे आगे बढ़ा, एक के बाद एक हुए ऐलानों से साफ हो गया कि बजट में सिर्फ ग्रोथ का मंत्र दिया गया। निर्मला सीतारामन ने बैंक को मजबूत बनाने और उनको ज्यादा पैसा देने, इंफ्रा को दुरुस्त करने और रियल्टी, इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बूस्ट देने का एलान किया। अमीरों पर टैक्स लगा दिया गया है।


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार इकोनॉमी को  5 लाख करोड़ डॉलर का बनाना चाहती है। इस साल देश की इकोनॉमी 3 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी जो कि विश्व की छठीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। वहीं पीएम मोदी ने निर्मला सीतारामण के बजट की खूब प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि ये बजट पांच लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी के सपने को पूरा करने वाला बजट है।


रियल एस्टेट को इस बजट से बड़ी सौगात मिली है। अफोर्डेबल हाउसिंक पर सरकार का फोकस बरकररार है और उसे बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने कई ऐलान किए हैं। सबसे बड़ा एलान है घर खरीदारों के लिए। अब 45 लाख के घर के लिए होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट को 2 लाख से बढ़ाकर साढ़े 3 लाख रुपए कर दिया गया है। ये छूट उन ग्राहकों को मिलेगी जो 31 मार्च 2020 तक घर खरीदेंगे। वित्त मंत्री ने तो यहां तक कहा कि ग्राहकों को 15 साल के लोन पर कुल 7 लाख रुपए की बचत होगी।


हाउसिंग लोन पर ब्याज पर छूट की सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 3.5 लाख रुपये कर दिया गया है। 45 लाख रुपए का घर खरीदने पर 1.5 लाख रुपए की छूट दी गई है। इसके अलावा भी हाउसिंग सेक्टर के लिए वित्त मंत्री ने कई एलान किए हैं। रेंटल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार नया टीनेंसी कानून लेकर आएगी जिसे बाद में राज्यों को दिया जाएगा। अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए अब क्रेंद सरकार और PSU की जमीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा अब रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट यानि REITS में विदेशी निवेशकों के लिए भी रास्ता बना दिया गया है। निर्मला सीतारामन ने ये भी एलान किया कि अब हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को रेगुलेट करने का काम NHB की जगह RBI करेगा।


इस बजट में आम आदमी को राहत वाली खबर तो कम ही मिली लेकिन कई चीजें महंगी जरूर कर दी गई हैं। सबसे ज्यादा मार पेट्रोल-डीजल को लेकर पड़ी है। पेट्रोल-डीजल पर एक रुपए एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई है साथ ही एक रुपए का इंफ्रा सरचार्ज भी लगाया गया है यानी पेट्रोल-डीजल पर अब आपको प्रति लीटर दो रुपए ज्यादा चुकाने होंगे। इसके अलावा सोना-चांदी, तंबाकू प्रोडक्ट, एयर कंडीशन, स्टील, टाइल्स, CCTV कैमरा, इंपोर्डेट काजू, इंपोर्डेट किताब जैसी चीजें महंगी हो गई हैं। सोना-चांदी पर कस्टम ड्यूटी दस परसेंट से बढ़ाकर साढ़े बारह परसेंट कर दी गई है।


बजट में वित्तमंत्री ने बैंकों के लिए बड़े एलान किए हैं। सरकार बैंकों को अतिरिक्त पूंजी देगी। यही नहीं आज वित्तमंत्री ने NBFCs को भी संकट से ऊबारने के लिए बड़े एलान किए हैं। सरकार ने आज विनिवेश की महत्वकांक्षी योजना का एलान किया है। विनिवेश का लक्ष्य बढ़ाकर एक लाख पांच हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है। सरकार अपनी सभी कंपनियों में हिस्सेदारी 51 परसेंट से नीचे ले आएगी। इसमें वित्तीय और गैर वित्तीय सभी कंपनियां शामिल हैं। जिस तरह बैंकों में मर्जर की योजना है, उसी तरह कुछ गैर वित्तीय PSUs का भी मर्जर होगा।


आज सरकार ने इंडस्ट्री को भी कॉरपोरेट टैक्स में बड़ी राहत दी है। पहले 250 करोड़ रुपए तक का टर्नओवर वाली कंपनियों को 25 परसेंट का कॉरपोरेट टैक्स देना पड़ता था, इस टर्नओवर की सीमा को बढ़ाकर चार सौ करोड़ रुपए कर दिया गया है। जिन कंपनियों का टर्नओनर 400 करोड़ रुपए से ज्यादा होगा उन्हें 30 परसेंट का कॉरपोरेट टैक्स देना होगा। आज के एलान से 99.3 परसेंट कंपनियों को फायदा होगा। सरकार ने बाजार में शेयर लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए पब्लिक शेयर होल्डिंग की न्यूनतम लिमिट 25 परसेंट से बढ़ाकर 35 परसेंट करने का एलान किया है। आज के एलान के बाद BSE 500 में 167 कंपनियों को बाजार में FPO लाना पड़ेगा।


सरकार ने आज धनकुबेरों को जरूर झटका दिया है। सालाना 2 से 5 करोड़ आमदनी वाले लोगों को 3 परसेंट का अतिरिक्त सरचार्ज देना होगा। जिनकी कमाई पांच करोड़ रुपए से ज्यादा उन्हें 7 परसेंट का सरचार्ज देना होगा। यही नहीं वित्तमंत्री ने आज नकद निकासी पर भी TDS लगा दिया। सालभर में 1 करोड़ तक कैश निकासी पर 2 परसेंट का TDS लगेगा, जबकि एक करोड़ रुपए से ज्यादा नकद निकालने पर 2.5 परसेंट का TDS कटेगा। ध्यान रहे ये TDS है, जब लोग रिटर्न फाइल करेंगे तो पैसा उन्हें वापस भी मिल सकता है।


बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों को बड़ा बूस्टर मिला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने ये साफ कर दिया है कि अब इलेक्ट्रिक वाहनों का जमाना है। बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर जो सबसे बड़ा एलान हुआ है वो ये कि इसपर जल्द GST 12 परसेंट से घटाकर 5 परसेंट कर दिया जाएगा। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर इनकम टैक्स में 1.5 लाख की अतिरिक्त छूट मिलेगी। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा के लिए बैट्री और चार्जिंग स्टेशन जैसे इंफ्रा पर भी फोकस बढ़ाने को लेकर वित्त मंत्री ने घोषणा की है।


बजट में स्टार्टअप्स पर भी खास फोकस दिखा। वित्त मंत्री ने स्टार्टअप्स को एंजेल टैक्स में छूट दे दी है। इसके अलावा अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट भी बात-बात पर स्टार्टअप्स को परेशान नहीं कर पाएंगे। जो स्टार्टअप रिटर्न भरते हैं उनकी स्क्रूटनी नहीं होगी। स्टार्टअप्स को बढ़ावा के लिए एक TV प्रोग्राम भी शुरू किया जाएगा।


रेल मंत्री पीयूष गोयल का मानना है कि ये बजट भविष्य के भारत की नींव डालने वाला दस्तावेज है। वहीं, इस बजट को कांग्रेस ने नई बोतल में पुरानी शराब बताया है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इस बजट में सिर्फ पिछले वादों को दोहराया गया है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि इस बजट में आमदनी और खर्चे का ब्यौरा नहीं दिया गया। उन्होंने बेहतर ग्रोथ के दावे के साथ साथ सेस लगाने के फैसले पर भी सवाल उठाया है।


मार्केट एक्सपर्ट रमेश दमानी का कहना है कि बजट में रेलवे के निजीकरण को बढावा देना बेहतर कदम है। हालांकि शेयर होल्डिंग नियम में हुए बदलाव से दिक्कतें बढ़ सकती हैं। 65 फीसदी पब्लिक शेयर होल्डिंग से नाराजगी है। इस फैसले से MNCs प्रोमोटर नाराज होंगे। हालांकि रेलवे में PPP से फायदा मिलेगा। वहीं मणिपाल यूनिवर्सल के चेयरमैन मोहनदास पई का कहना है कि फाइनेंशियल सेक्टर के लिए बजट में बड़े रिफॉर्म हुए हैं। बैंक, NBFCs के लिए बेहतर कदम उठाए गए हैं। CII के वाइस प्रेसिडेंट टी वी नरेंद्रन का मानना है कि इंफ्रा में 1 लाख करोड़ की योजना अच्छी खबर है। इसके लिए सही तरीके से पूंजी जुट जाए तो ये दूसरे सेक्टर्स के लिए भी बूस्टर साबित होगा। हालांकि रसना के चेयरमैन पिरुज खंभाटा को इस बजट से ज्यादातर निराशा हुई है। पिरुज का कहना है कि रोजगार, एक्सपोर्ट और कृषि में कॉरपोरेट निवेश को लेकर उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हुईं।