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Budget 2020: बजट में MDR चार्ज हटाने का एलान संभव

डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार सभी डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर लगने वाले MDR चार्ज को पूरी तरह हटा सकती है।
अपडेटेड Jan 26, 2020 पर 10:26  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार सभी डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर लगने वाले MDR चार्ज को पूरी तरह हटा सकती है। बजट में सरकार इसका एलान कर सकती है।


सूत्रों के मुताबिक बजट में डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर MDR चार्ज से राहत मिल सकती है। मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर बजट में एलान संभव है। MDR चार्ज से राहत के लिए प्रस्ताव पर NPCI, RBI के साथ बातचीत शुरु है।


अगर डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर MDR चार्ज से राहत मिलती है तो इससे करीब 2,000 करोड़ का सालाना बोझ पड़ेगा। Rupay, UPI पर से चार्ज नहीं लगता है। आपको बता दें कि मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर बैंकों को MDR चार्ज चुकाता है। 2000 से कम ट्रांजैक्शन पर MDR चार्ज नहीं है जबकि 2000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.60% MDR चार्ज चुकाना होता है। धिकतम चार्ज प्रति ट्रांजैक्शन 150 तय किया गया है।


क्या है MDR चार्ज


एमडीआर वह फीस है, जो दुकानदार डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर आपसे लेता है। आप कह सकते हैं कि यह डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पेमेंट की सुविधा पर लगने वाली फीस है। एमडीआर से हासिल रकम दुकानदार को नहीं मिलती है। कार्ड से होने वाले हर पेमेंट के एवज में उसे एमडीआर चुकानी पड़ती है।


क्रेडिट या डेबिट कार्ड से पेमेंट पर एमडीआर की रकम 3 हिस्सों में बंट जाती है। इसमें से सबसे बड़ा हिस्सा क्रेडिट या डेबिट कार्ड जारी करने वाले बैंक को मिलता है। इसके बाद कुछ हिस्सा उस बैंक को मिलता है, जिसकी प्वाइंट ऑफ सेल्स (POS) मशीन दुकानदार के यहां लगी होती है। अंत में एमडीआर का कुछ हिस्सा पेमेंट कंपनी को मिलता है। वीजा, मास्टर कार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस प्रमुख पेमेंट कंपनियां हैं।


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