बजट 2021: सस्ते घरों के लिए ब्याज पर डिडक्शन एक साल और बढ़ाया गया

यह डिडक्शन इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 24(B) के तहत ब्याज भुगतान पर मिलने वाले 2 लाख रुपये के डिडक्शन से हटकर है
अपडेटेड Feb 02, 2021 पर 17:10  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अश्विनी कुमार शर्मा


होम लोन (Home Loan) लेकर अफॉर्डेबल (सस्ते) घर खरीदने पर मिलने वाला फायदा एक साल के लिए और बढ़ा दिया गया है। सस्ते घरों के होम लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज पर मिलने वाले अतिरिक्त डिडक्शन का फायदा अब बढ़ाकर 31 मार्च 2022 तक कर दिया गया है। जुलाई 2019 में आए बजट में वित्त मंत्री ने एक नया सेक्शन 80EEA पेश किया था और इसके तहत ब्याज पर अतिरिक्त डिडक्शन का ऐलान किया था।


यह डिडक्शन 1.5 लाख रुपये किया गया था। ये फायदा ऐसे सभी टैक्सपेयर्स को मिल रहा है, जिन्होंने सस्ता घर खरीदने के लिए होम लोन लिया है। रियल ऐस्टेट एक्सपर्ट्स ने सरकार के इस प्रस्ताव का स्वागत किया है।


नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल कहते हैं, “सरकार ने टैक्स बेनेफिट्स को एक साल और बढ़ाकर अफॉर्डेबल हाउसिंग पर अपना फोकस बनाए रखा है। लंबे वक्त से जारी महामारी के दौर में इस बेनेफिट को एक साल और बढ़ाने से देश में सुस्त पड़ी घरों की मांग में इजाफा होगा।”


सेक्शन 80EEA क्या है?


सेक्शन 80EEA के तहत कोई भी शख्स होम लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज पर 1.5 लाख रुपये तक के डिडक्शन को क्लेम कर सकता है। इसमें शर्त ये है कि उसके पास लोन पास होने की तारीख तक कोई दूसरी हाउस प्रॉपर्टी नहीं होनी चाहिए।


यह डिडक्शन इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 24(B) के तहत ब्याज भुगतान पर मिलने वाले 2 लाख रुपये के डिडक्शन से हटकर है। इस सेक्शन के तहत बेनेफिट लेने का एक क्राइटेरिया यह है कि हाउस प्रॉपर्टी की स्टैंप ड्यूटी 45 लाख रुपये या इससे कम होनी चाहिए।


अफॉर्डेबल हाउसिंग क्या है?


इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में अफॉर्डेबल हाउसिंग ऐसे घरों को कहा जाता है, जिनका कारपेट एरिया 60 वर्ग मीटर (645 वर्ग फुट) से ज्यादा नहीं होता है। अफॉर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा के मुताबिक, दूसरे शहरों में ये कारपेट एरिया 90 वर्ग मीटर (968 वर्ग फुट) से ज्यादा नहीं होना चाहिए।


रियल ऐस्टेट सेक्टर के कई एक्सपर्ट्स मांग कर रहे थे कि अफॉर्डेबल होन की परिभाषा में बदलाव किया जाए। हालांकि, इस साल के बजट में उनकी ये मांग मानी नहीं गई है।


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