गांवों, किसानों के लिए होगा बजटः अरविंद पानगढ़िया

इस बार का बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और कृषि में सुधार पर फोकस करने पर हो सकता है।
अपडेटेड Feb 26, 2016 पर 16:46  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

नीति आयोग के चेयरमैन डॉ अरविंद पानगढ़िया का कहना है कि आर्थिक सर्वे से साफ हो गया है कि सरकार अपने वित्तीय घाटे के नियंत्रण के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बढ़ रही है। वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने के लक्ष्य से अगर सरकार जरा भी हटती है तो उसपर सवाल उठाए जाएंगे। वित्तीय घाटा 3.5-3.8 फीसदी के बीच रहने की पूरी उम्मीद है। आर्थिक सर्वे से स्पष्ट है कि अगले साल ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी धीमी रहेगी हालांकि वैश्विक हालातों के आधार पर सरकार की कोशिश सतर्क रहने की है। वित्त वर्ष 2017 में 7-7.5 फीसदी की ग्रोथ रहने की जो बात कही गई है, इससे ज्यादा भी हो सकती है अगर ग्लोबल संकेत अच्छे रहते हैं।


सरकार को फिस्कल कंसोलिडेशन प्लान पर बने रहना चाहिए और इसके अलावा बैंकों को कैपिटलाइज करने की भी जरूरत है। 3 सालों में 70,000 करोड़ रुपये की पूंजी देने की जो बात कही गई है वो बैंकों के विशाल एनपीए को देखते हुए कम लग रहा है। आर्थिक सर्वे में जो सुझाव दिए गए हैं, उनपर किस तरह से क्रियान्वयन किया जा सकता है ये देखना अहम होगा। सरकारी बैंकों का प्रबंधन अपने पास रखते हुए भी इनके शेयर किस तरह जनता को दिए जा सकते हैं इस पर सरकार को विचार करना चाहिए। इस तरह सरकार इस विषय में काफी जागरूक है और वित्त मंत्री ने भी कहा कि अगर बाजार खराब बना रहेगा तो भी विनिवेश के रास्ते और भी हैं।


कंपनियों का निजीकरण किया जा सकता है जिसके लिए शेयर बेचे जा सकते हैं या स्ट्रेटेजिक करार किया जा सकता है। इस समय निवेशकों का मत है कि सरकारी कंपनियों के शेयर बेचे जाएं जिससे सरकार के पास ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए पूंजी हो। केवल टैक्स राजस्व से इस काम को नहीं किया जा सकता है।


स्टील, कंस्ट्रक्शन कंपनियों की बैलेंसशीट काफी कमजोर दिख रही है तो इसके लिए सरकार को बीमारू कंपनियों के ऐसेट बेचकर बाजार में पूंजी लानी चाहिए। वहीं बजट के बाद अप्रैल में आने वाली क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन के पास दरें घटाने के मौके होंगे या नहीं, इसका फैसला आरबीआई ही करेगी।


सरकार का पूरा ध्यान रोजगार बढ़ाने के उपायों पर भी है और सरकार जो नई योजनाएं ला रही है उससे निश्चित तौर पर रोजगार के मौके बढ़ेंगे। देश में मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए काम हो रहे हैं और इससे मेक इन इंडिया से भी सहारा मिलेगा। एक्सपोर्ट आधारित इंडस्ट्री और कंपनियां भी काफी मात्रा में रोजगार देती हैं तो इनके लिए कंपनियों को भारत में आकर्षित करने का सही अवसर है। इस समय चीन की कंपनियों को मैन्यूफैक्चरिंग के लिए भारत में आकर्षित करने की जरूरत है।


अभी ऐसा समय नहीं आया है कि कृषि पर टैक्स लगाया जाए और खेती की भूमि पर टैक्स लगाया जाए। खेती से होने वाली आय पर अभी टैक्स लगाने का ऐलान इस बजट में होने की कोई उम्मीद नहीं है। इस बार का बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और कृषि में सुधार, गांवों, किसानों की हालत में सुधार पर फोकस करने वाला बजट साबित हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री सिंचाई योजना पर काफी ध्यान है और इरीगेशन वो माध्यम है जिसके जरिए गांवों, किसानों की हालत में काफी तरक्की हो सकती है।


वीडियो देखें