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GST जांच के लिए CBIC ने जारी कीं गाइडलाइंस, प्रिंसिपल कमिश्नर की मंजूरी जरूरी; बड़ी कंपनियों के मामले में क्या निर्देश

CBIC Guidelines For GST Investigation: CBIC के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि कर अधिकारियों को करदाता से वह जानकारी नहीं मांगनी चाहिए, जो GST पोर्टल पर पहले से ही ऑनलाइन उपलब्ध है। प्रत्येक जांच, प्रिंसिपल कमिश्नर की मंजूरी के बाद ही शुरू की जानी चाहिए। कर अधिकारियों के लिए जांच शुरू होने के एक साल के अंदर जांच पूरी करने की समय सीमा भी तय की गई है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Mar 31, 2024 पर 4:38 PM
GST जांच के लिए CBIC ने जारी कीं गाइडलाइंस, प्रिंसिपल कमिश्नर की मंजूरी जरूरी; बड़ी कंपनियों के मामले में क्या निर्देश
किसी सामान/सेवा पर पहली बार शुल्क लगाने के लिए भी जोनल प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर्स की मंजूरी लेनी होगी।

CBIC Guidelines For GST Investigation: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Indirect Taxes and Customs or CBIC) ने सेंट्रल GST (CGST) अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत GST फील्ड ऑफिसर्स को अब किसी भी बड़े औद्योगिक घराने या प्रमुख मल्टीनेशनल कंपनी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले अपने जोनल प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर्स की मंजूरी लेनी होगी। उन्हें किसी सामान/सेवा पर पहली बार शुल्क लगाने के लिए भी जोनल प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर्स की मंजूरी लेनी होगी।

इन दिशानिर्देशों के अनुसार जब एक करदाता की जांच अलग-अलग मामलों में राज्य GST और DGGI अधिकारी कर रहे हैं, तो प्रिंसिपल कमिश्नर्स इस संभावना पर विचार करेंगे कि क्या करदाता के संबंध में सभी मामलों को एक कार्यालय द्वारा आगे बढ़ाया जा सकता है। दिशानिर्देशों में कर अधिकारियों के लिए जांच शुरू होने के एक साल के अंदर जांच पूरी करने की समय सीमा भी तय की गई है।

साथ ही यह भी कहा गया कि जांच पूरी होने के बाद कारण बताओ नोटिस में देर नहीं होनी चाहिए। संबंधित व्यक्ति की ओर से सरकारी बकाए का उचित भुगतान होने के बाद क्लोजर रिपोर्ट में भी देरी नहीं होनी चाहिए।

लिस्टेड कंपनी या PSU की जांच का मामला

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