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COMMODITY MARKET: कैसी हो रणनीति, अब कौन सी कमोडिटी में हैं कमाई के मौके

ये हफ्ता कमोडिटी बाजार के लिए काफी उथलपुथल भरा रहा है।
अपडेटेड Feb 14, 2020 पर 19:04  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

ये हफ्ता कमोडिटी बाजार के लिए काफी उथलपुथल भरा रहा है। कोरोना वायरस के डर के बावजूद कच्चे तेल में निचले स्तर से अच्छी रिकवरी देखने को मिली। वहीं सोना भी मजबूती के साथ 40 हजार के ऊपर टिका रहा है। एल्युमिनियम, लेड और निकेल जैसे चुनिंदा मेटल्स में भी खासी रिकवरी दिखी। सोयाबीन, ग्वार और कॉटन जैसी एग्री कमोडिटीज पर खासा दबाव देखने को मिला। कोरोना वायरस को लेकर जारी चिंता के बीच आगे नॉन एग्री और एग्री कमोडिटीज में कैसा रुख देखने को मिलेगा। आज कमोडिटी आउटलुक में सीएनबीसी-आवाज़ पर Abans Group of Companies के अभिषेक बंसल, मोतीलाल ओसवाल के किशोर नार्ने और कमोडिटी वर्ल्ड के मयूर मेहता से इसी पर बात करेंगे।


कच्चे तेल में रिकवरी


1 हफ्ते में ब्रेंट के दाम करीब 3.5% बढ़े हैं। ब्रेंट फरवरी के निचले स्तर से करीब 6 प्रतिश बढ़ा है। OPEC की उत्पादन कटौती बढ़ने की संभावना है। ग्लोबल डिमांड में कमी की आशंका बरकरार है। कोरोना वायरस के कारण डिमांड में कमी के आसार नजर आ रहे हैं। 1 दशक में पहली बार क्रूड डिमांड में कमी की आशंका जताई गई है। आईईए के सूत्रों के अनुसार Q4 में ग्लोबल फ्यूल खपत 4.35 BPD घट सकती है।


सोने में कितनी मजबूती


MCX पर लगातार चौथे हफ्ते दाम 40,000 के ऊपर दिखाई दे रहे हैं। कोरोना वायरस को लेकर चिंता से सोने को सपोर्ट मिला है। वहीं दूसरी तरफ चीन में कोरोना वायरस के नए मामले बढ़े हैं।


कॉटन पर दबाव


कॉटन पर उत्पादन बढ़ने और हल्की क्वालिटी के कारण दबाव बना हुआ है। इस साल 3.54 करोड़ गांठ कॉटन उत्पादन का अनुमान जताया जा रहा है। 2018-19 के मुकाबले 13.6 प्रतिशत ज्यादा उत्पादन का अनुमान है। इस साल 42 लाख गांठ के एक्सपोर्ट की संभावना है। इस साल घरेलू खपत 3.31 करोड़ गांठ रहने की उम्मीद है। वहीं कोरोना वायरस के कारण कॉटन, यार्न एक्सपोर्ट पर असर हुआ है। बता दें कि भारत के कॉटन एक्सपोर्ट में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी चीन की है।


ग्वार एक्सपोर्ट में कमी के आसार


खबरों के अनुसार FY 20 में ग्वार गम एक्सपोर्ट 20 प्रतिशत गिर सकता है। ग्वार गम एक्सपोर्ट 2.8 से 3.0 लाख रहने के आसार हैं। अमेरिका से ग्वार गम की डिमांड कम हुई है। अमेरिका में एक्टिव ऑयल रिग्स में गिरावट नजर आ रही है। उधर सस्ते विकल्पों के कारण ग्वार गम की डिमांड कम हुई है।


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