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कमोडिटी आउटलुकः ओपेक में क्रूड पर बनेगी बात!

प्रकाशित Fri, 07, 2018 पर 16:47  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

ओपेक के प्रोडक्शन कटौती की उम्मीद से जहां तेजी आई, वहीं सदस्यों में सहमति नहीं बन पाने की वजह से कीमतों में भारी गिरावट भी आई है। कतर के ओपेक से बाहर होने के बाद ईरान भी प्रोडक्शन कटौती के खिलाफ हो गया। नाइजीरिया ने कल ही कटौती से इनकार कर दिया। ईरान और सऊदी अरब में पहले से ही तनाव है। ऐसे में ओपेक ने रूस के पाले में गेंद उछाल दिया। लेकिन रूस अपने क्लाइमेट कंडीशन की वजह से 1.5 लाख बैरल से ज्यादा उत्पादन कटौती के पक्ष में नहीं है। सवाल ये है कि ऐसे माहौल में आगे कैसी रहेगी क्रूड की चाल।


कच्चे तेल में गिरावट देखने को मिली है। ब्रेंट 60 डॉलर के नीचे तक फिसला गया है जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड में 51 डॉलर के पास कारोबार कर रहा है।  कच्चा तेल 4 साल की ऊंचाई से 30 फीसदी भाव लुढ़का है। सप्लाई बढ़ने के अनुमान से दबाव देखने को मिल रहा है।


इस बीच ओपके देशों की बैठक में भारत की आवाज बुलंद है, ऑस्ट्रिया में चल रही ओपेक की बैठक में सउदी अरब के तेल मंत्री ने कहा कि उत्पादन घटाने के फैसले से पहले भारत के हितों का ध्यान रखा जाएगा उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे बातचीत में तेल की कीमतें कम रखने को कहा था। वहीं अमेरिका की ओर से ओपेक पर दबाव बन रहा है। अमेरिका क्रूड के ऊंचे भाव के खिलाफ है। ओपेक उत्पादन घटाया तो ईरान को फायदा होगा। रूस सिर्फ 1.5 लाख बैरल घटाने को तैयार है।