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Gold Hallmarking 1 जून से अनिवार्य, इसके बाद केवल 14, 18 और 22 कैरेट की गोल्ड ज्वैलरी ही बिकेगी

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया कि 1 जून, 2021 से देश में गोल्ड हॉलमार्किंग को अनिवार्य कर दिया जाएगा, अभी तक यह स्वैच्छिक था
अपडेटेड Apr 14, 2021 पर 11:43  |  स्रोत : Moneycontrol.com

देश में 1 जून, 2021 से केवल हॉलमार्क वाली गोल्ड ज्वैलरी (gold jewellery) ही बिकेगी। केंद्र सरकार ने आज साफ कर दिया कि 1 जून से गोल्ड हॉलमार्किंग (Gold Hallmarking) को अनिवार्य कर दिया जाएगा। अभी तक यह स्वैच्छिक यानी वॉलेंटरी था, लेकिन अब इसे मैंडेटरी कर दिया जाएगा। आपको बता दें कि हॉलमार्क सोने की शुद्धता का प्रतीक होता है।

हॉलमार्क वाली गोल्ड ज्वैलरी बिकने से देश में 1 जून से 14, 18 और 22 कैरेट सोने के आभूषण ही बिकेंगे। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने सोने के आभूषणों और कलाकृतियों के लिए हॉलमार्किंग को 15 जनवरी, 2021 से अनिवार्य करने की घोषणा नवंबर, 2019 में की थी। लेकिन कोरोना वायरस महामारी के देखते हुए इसकी तिथि 1 जून कर दी थी, जिसे अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

केंद्र सरकार ने ज्वैलर्स को गोल्ड हॉलमार्किंग की तैयारी करने और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के पास अपना रजिस्ट्रेशन कराने के लिए 1.5 साल से अधिक का समय दिया है। गोल्ड हॉलमार्किंग से सोने के गहनों (Gold Jewellery) की खरीदारी में अब धोखाधड़ी की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी और लोगों को शुद्ध सोना मिल सकेगा।

उपभोक्ता मामलों की सचिव लीना नंदन ने कहा कि BIS ज्वैलर्स को हॉलमार्किंग की मंजूरी देने में जुटा हुआ है। वहीं, BIS के डायरेक्टर प्रमोद कुमार तिवारी ने कहा कि हम 1 जून, 2021 से हॉलमार्किंग अनिवार्य करने के लिए तैयार हैं। हमें इस तारीख को आगे बढ़ाने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं मिला है।

आपको बता दें कि अभी तक देश के 35 हजार से अधिक ज्वैलर्स ने BIS के पास रजिस्ट्रेशन करा लिया है। BIS के डायरेक्टर ने उम्मीद जताई कि अगले एक-दो महीने में रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 1 लाख पर पहुंच जाएगा। आपको भारत सबसे अधिक सोने का आयात करता है। भारत सालाना 700 से 800 टन सोना विदेश से खरीदता है।

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