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सरकार किसानों को मुफ्त तिलहन बांट रही है, जानिए क्या है स्कीम और आपको कैसे मिलेगा?

सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से तिलहन का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर अतिरिक्त निर्भरता कम होगी
अपडेटेड May 31, 2021 पर 14:40  |  स्रोत : Moneycontrol.com

देश भर में पेट्रोल-डीजल के दाम में जिस तरह से आग लगी हुई है। वैसे ही इन दिनों खाने के तेल के दाम में जबरदस्त इजाफा हुआ है। खाने के तेल के बढ़ते दामों के बीच केंद्र सरकार ने किसानों को फ्री में तिलहन बीज मुहैया कराने का फैसला लिया है।


सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से तिलहन का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और अतिरिक्त आयात पर निर्भरता कम होगी। हालांकि जानकारों का मानना है कि 1960 के दशक का विंटेज का विचार आज बेहतर नतीजा नहीं दे सकता है।  


केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narender Singh Tomar) देश के करीब एक तिहाई जिलों में जुलाई महीने से शुरू होने वाली खरीफ (गर्मी) की फसलों के लिए तिलहन के बीज फ्री में दिया जाएगा। किसानों को उच्च गुणवत्ता (high-quality) के हजारों पैकेट दिए जाएंगे। इस योजना में अप्रैल में केद्र सरकार ने राज्यों के बीच चर्चा की थी।
 
एक अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि सरकार तिलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए करीब 800,000 सोयाबीन बीज के मिनी किट और 74,000 मूंगफली बीज के मिनीकिट दे रही है।


बता दें कि दालों की तरह भारत अपनी खाद्य तेल की मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है। औसतन खाद्य तेलों की सालाना मांग करीब 2.4 करोड टन है। जबकि घेरलू उत्पादन से 80 लाख से 1.1 करोड़ टन के बीच होता है। इसमें 60 फीसदी मांग आयात के जरिए पूरी की जाती है। पिछले 2 महीने से ग्लोबल लेवल पर खाने के तेल के दाम में हाई है। भोजन की टोकरी में खाद्य तेल सबसे महंगा आइटम बन गया है।
 
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय (Consumer affairs ministry) के एक साल के आंकड़ों से पता चलता है कि खाने के तेल की कीमतों में 60 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। एक लीटर सरसों के तेल की औसत कीमत मई में बढ़कर 170 रुपये हो गई है। जो कि पिछले साल इसी अवधि में 120 रुपये थी। इसी तरह मूंगफली का तेल, सोया तेल, पॉम तेल, और सन्फ्लॉवर तेल के दाम पिछले एक दशक से हाई लेवल पर हैं।


सरकार की योजना है कि इस साल जुलाई से शुरू होने वाले आगामी खरीफ (गर्मी) मौसम में तिलहन के तहत 6.37 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त रकबा में तेल की बुवाई करने का मकसद है। इससे 1.2 लाख क्विंटल तिलहन और 24.3 लाख क्विंटल खाद्य तेल का उत्पादन होने की संभावना है।


जानिए किसे मिलेगा


मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के 41 जिलों में अंतर-फसल के लिए 76.03 करोड़ रुपये की लागत से सोयाबीन के बीज बांटे जाएंगे। इससे 1.47 लाख हेक्टेयर रकबे में तिलहन की बुवाई होगी। इसके अलावा, 104 करोड़ रुपये की लागत के साथ सोयाबीन के बीज आठ राज्यों में बांटे जाएंगे। जिसमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात के 73 जिले शामिल हैं। इन राज्यों में 3,90,000 हेक्टेयर का रकबा शामिल होगा।


मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तर प्रदेश और बिहार के 90 जिलों में करीब 8.16 लाख बीज के मिनी-किट बांटे जाएंगे। यहां खेती का रकबा 10.06 लाख हेक्टेयर होगा।


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