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तेल और तिलहन में उठापटक, एग्री में क्या हो रणनीति

प्रकाशित Fri, 11, 2019 पर 17:06  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एग्री कमोडिटी में खाने के तेल और तिलहन पर फोकस है। दरअसल सरसों का भाव पिछले 8 महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गया है और इस गिरावट की जद में सोयाबीन भी आ गया है, जो इस हफ्ते 6 महीने का ऊपरी स्तर छूने के बाद अब दबाव में है। वहीं दूसरी ओर भारत में पाम तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी कम होने के बाद इसकी कीमतें गिरने के बजाए पिछले 2 महीने की ऊंचाई पर चली गई हैं। इस बीच चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर कम होने की उम्मीदों के बीच सवाल ये है कि आगे तेल और तिलहन की चाल कैसी रहेगी।


3 हफ्ते में सोयाबीन के दाम में करीब 6 फीसदी का उछाल देखने को मिला है। वायदा में इसका भाव 6 महीने के ऊपरी स्तर पर नजर आ रहा है। दिसंबर में सोयामील एक्सपोर्ट 42 फीसदी बढ़ी है। प्लांटों की मांग बढ़ने से सोयाबीन की कीमतों को सपोर्ट मिला है। वहीं यूएस-चीन में सुलह की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में भी तेजी देखने को मिल रही है।


इधर सरसों में मंदी देखने को मिल रही है। 3 हफ्ते में इसका भाव करीब 6 फीसदी लुढ़का है। सरसों का भाव 8 महीने के निचले स्तर पर है। खेती बढ़ी पैदावार बढ़ने का अनुमान है। बुआई 2.2 फीसदी बढ़कर 66.43 लाख हेक्टेयर हुई है।


वही 1 महीने में सोया और पाम तेल की कीमतों में 6-8 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है। मलेशिया में पाम तेल का दाम ब‍ढ़ा है। भारत में इंपोर्ट ड्यूटी घटने से पाम तेल में तेजी देखी जा रही है। बता दें कि भारत में पाम तेल का इंपोर्ट बढ़ने का अनुमान है।