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19 मई के बाद Petrol-Diesel के दामों में लगने वाली है आग!

प्रकाशित Wed, 08, 2019 पर 10:32  |  स्रोत : Moneycontrol.com

2 मई से अमेरिका ने ईरान से ऑयल इंपोर्ट कर रहे देशों पर सख्ती बढ़ा दी है, जिसका प्रभाव भारत पर भी पड़ेगा। भारत में क्रूड ऑयल का इस्तेमाल होने वाला अधिकतर हिस्सा बाहर से इंपोर्ट किया जाता है, जिसमें ईरान की भी बड़ी हिस्सेदारी है।


ईरान से कितना तेल आयात?


भारत में 2018-19 में तेल का जितना भी उपभोग हुआ है, उसका 83.7 फीसदी इंपोर्ट किया गया था। 2015-16 में ये आंकड़ा 8.6 फीसदी था। 2015-16 में इंपोर्ट किए जाने वाले क्रूड ऑयल की मात्रा 202.9 मिलियन टन थी, जो 2018-19 में 226.6 मिलियन टर्न हो गई। 2015-16 में भारत ने क्रूड ऑयल की खरीद के लिए 65.6 बिलियन डॉलर खर्च किया था। 2018-19 में यह आंकड़ा 114.2 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया। यानी कि भारत में इंपोर्टेड ऑयल की मात्रा और कीमतें दोनों बढ़ीं।


भारत जितनी मात्रा में ऑयल इंपोर्ट करता है उसका बड़ा हिस्सा ईरान से आता है। 2018-19 में भारत में 114.2 बिलियन डॉलर का क्रूड ऑयल इंपोर्ट किया था जिसमें से 10.6% यानी कि 12.1 बिलियन डॉलर की कीमत का तेल ईरान से आया था।


ईरान दुनिया के सबसे ज्यादा तेल एक्सपोर्ट करने वाले देशों में से एक है। तेल के कुल ग्लोबल एक्सपोर्ट में ईरान 4 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है। ईरान के तेल निर्यात करने पर अमेरिका ने कई प्रतिबंध लगा रखे हैं। हालांकि, दुनिया के 8 देशों को इन प्रतिबंधों से छूट मिली हुई थी, जिनमें भारत भी शामिल था। प्रतिबंधों के ढील के बाद ईरान से तेल आयात करने वाले देश हैं- चीन, जापान, साउथ कोरिया, तुर्की, ताइवान, इटली और ग्रीस।


अमेरिका ने 2 मई से इन देशों को मिली हुई छूट को खत्म करने का ऐलान कर दिया था। अमेरिका का कहना था कि जिन देशों को ईरान से तेल आयात करने की छूट मिली हुई है वह छूट खत्म कर दी जाएगी।


लोकसभा चुनावों के बाद कीमतों में लगेगी आग


अब जब एक्सपोर्टेड तेल का 4 फीसदी हिस्सा मार्केट से गायब हो जाएगा तो जाहिर तौर पर क्रूड के दाम बढ़ेंगे। इस आशंका को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले ही क्रूड के दाम काफी बढ़ गए हैं। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड के दामों में 10 फीसदी की तेजी देखी गई है लेकिन भारत में फिलहाल फ्यूल प्राइस स्थिर ही रहे हैं।


भारत में इसकी स्थिति पर फिलहाल कोई प्रभाव नहीं पड़ा है, जिसके पीछे लोकसभा चुनाव एक बड़ी वजह है। अगर भारत में इंटरनेशनल क्रूड प्राइस में उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ रहा तो इसकी वजह है कि लोकसभा चुनाव चल रहे हैं। लोकसभा चुनावों के लिए वोटिंग 19 मई को खत्म हो रही है। इस दौरान सरकार नहीं चाहेगी कि तेल की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव आए, जिससे उसके वोटिंग परसेंट पर फर्क पड़ सकता है।


तेल कंपनियां करेंगी भरपाई


हालांकि, चुनाव खत्म होने के बाद अनुमान है कि क्रूड के दाम तेजी से बढ़ेंगे क्योंकि ऑयल कंपनियां मौजूदा स्थितियों में उठा रहे नुकसान की भरपाई करने की पूरी कोशिश करेंगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेल की कीमतों का बोझ उठा रही कंपनियां आखिरकार सारा बोझ उपभोक्ताओं के सिर पर डालेंगी। अनुमान जताया जा रहा है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 से 5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की जा सकती है।