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मौसम की मार पड़ने से FY 2019 में कपास का उत्पादन घटा

इस गिरावट का मुख्य कारण कपास उगाने वाले कई क्षेत्रों में सूखा पड़ना है।
अपडेटेड Apr 16, 2019 पर 12:59  |  स्रोत : Moneycontrol.com

घरेलू कपड़ा उद्योग ने यह आंकड़ा, अक्टूबर-सितंबर 2018 फसल सत्र के लिए कपास उत्पादक क्षेत्रों से एकत्रित वास्तविक आंकड़ों के अनुमान पर व्यक्त किया है।


देश के अधितर जगह सूखे की मार झेल रहे हैं, जिसका असर सबसे ज्यादा फसलों पर पड़ा है। जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। सोमवार को भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ यानी CITI ने कपास उत्पादन के आंकड़े जारी करके सबको चौंका दिया। इन ताजा आंकडों के मुताबिक कपास उत्पादन में गिरावट आने के आसार हैं। साल 2018-19 में भारत की कपास की फसल का उत्पादन 7.87 फीसदी घटकर 343 लाख गांठ रह सकता है. एक गांठ का वजन 170 किलो होता है.


इस गिरावट का मुख्य कारण कपास उगाने वाले कई क्षेत्रों में सूखा पड़ना है। CITI के अध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि सितंबर 2018 को समाप्त पिछले सत्र में कपास का उत्पादन 370 लाख गांठ था। उन्होंने कहा कि पिछले 12 सालों में सबसे खराब उत्पादन 348 लाख गाठ का रहा। जो चालू सत्र के 343 लाख गांठ के उत्पादन से कहीं अधिक है।


घरेलू कपड़ा उद्योग निकाय ने यह आंकड़ा, अक्टूबर-सितंबर 2018 फसल सत्र के लिए कपास उत्पादक क्षेत्रों से एकत्रित वास्तविक आंकड़ों के अनुमान पर व्यक्त किया है। कपास सलाहकार बोर्ड ने 22 नवंबर 2018 को कपास की फसल 361 लाख गांठ होने का अनुमान जताया था। जैन ने कहा कि गुजरात के कपास उत्पादक क्षेत्र, महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्र, कपास उगाने वाले राज्यों में कुछ क्षेत्रों में पैदावर प्रभावित हुई है।


CITI के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि अप्रैल 2019 के लिए अपनी रिपोर्ट में अंतर्राष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति ने 2019-20 के लिए वैश्विक उत्पादन में 6 फीसदी की वृद्धि के साथ 2.76 करोड़ टन और 2019-20 के लिए अंत में अत्यधिक भंडार का अनुमान लगाया है।


जैन ने कहा कि वैश्विक उत्पादन में 6 फीसदी की वृद्धि के साथ कपास की कीमतें स्थिर और सीमित दायरे में रहने की संभावना है। भारत में जून 2019 से मानसून के जल्द आगमन और आयात बढ़ने से कपास की कीमतों पर दबाव रह सकता है।