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पूरी दुनिया की नजर OPEC के फैसले पर, जानिये कटौती से सप्लाई पर कितना असर

कारोबारी देश ज्यादा सप्लाई के चलते OPEC कटौती चाहते हैं।
अपडेटेड Dec 07, 2019 पर 12:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

OPEC के फैसले के औपचारिक एलान से पहले कच्चे तेल के दाम 2 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। खबरें आ रही हैं कि OPEC में उत्पादन कटौती बढ़ाने पर सहमति बन गई है जो कि 12 लाख बैरल से बढ़कर 17 लाख बैरल हो सकती है। हालांकि ये कटौती OVER COMPLIANCE के बराबर ही होगी। ऐसे में आने वाले कुछ महीनों में कच्चे तेल की दिशा कैसी रहेगी। सीएनबीसी-आवाज़ पर आज इसी पर चर्चा करेंगे। चर्चा के लिए कमोडिटी गुरू जी चंद्रशेखर, Anand Rathi Shares & Stock Brokers के नवीन माथुर और MOFSL के किशोर नार्ने सीएनबीसी-आवाज़ के साथ जुड़ गये हैं।


कच्चे तेल में तेजी क्यों?


कच्चा तेल 2 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गया है। कटौती की आशंका के चलते इसमें उछाल देखने को मिला है। OPEC देशों की होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द हो गई है। इसके अनुसार Q1 2020 के लिए रूस 5 लाख bpd से ज्यादा कटौती के पक्ष में है। जनवरी 2019 से OPEC की 1.2mln bpd की कटौती जारी है। जनवरी 2017 में पहली बार उत्पादन में कटौती की है।


बदलेगा OPEC का अध्यक्ष


अगले साल से OPEC को नया अध्यक्ष मिलेगा। 2020 से अल्जीरिया OPEC की अध्यक्षता करेगा। इसके बाद वेनेजुएला की जगह अल्जीरिया अध्यक्षता करेगा।  OPEC की बैठक में इस पर फैसला हुआ। अब अल्जीरिया के मोहम्मद अरकब अध्यक्ष होंगे। OPEC के सभी 14 देशों को अध्यक्षता पद मिलेगा।


OPEC क्यों चाहता है कटौती?


कटौती करके कच्चे तेल की कीमतें थामने की कोशिश की जा रही है। कारोबारी देश ज्यादा सप्लाई के चलते OPEC कटौती चाहते हैं। US में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा है। इस बार 22 नवंबर वाले हफ्ते में US का रिकॉर्ड उत्पादन रहा है। US ने 12.9 ml bpd का रिकॉर्ड उत्पादन किया। OPEC देशों के साथ रूस भी कटौती के पक्ष में है। इस बार कटौती 12 लाख से बढ़कर 17 लाख बैरल होने की उम्मीद है।


तेल आयात के आंकड़े


महीना  अरब डॉलर


Jan19                11.24
Feb 19               9.38       
Mar 19               11.75
Apr 19                11.38    
May 19               12.44    
Jun 19                11.03
July 19                9.6
Aug 19                10.88
Sept 19                8.98
Oct 19                 9.63


वित्तीय घाटा (FISCAL DEFICIT)


जीडीपी का प्रतिशत (PERCENTAGE OF GDP)


साल                        प्रतिशत
2014-15               4.10 प्रतिशत   
2015-16               3.89 प्रतिशत   
2016-17               3.52 प्रतिशत       
2017-18               3.50 प्रतिशत       
2018-19               3.40 प्रतिशत   
2019-20               3.40 प्रतिशत


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