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डाटा कहते हैं मार्च में होती है बुल-बीयर की तगड़ी लड़ाई, क्या 2021 में बीयर के हाथ लगेगी बाज़ी

जानकारों का कहना है कि अच्छी बात यह है कि बाजार अपट्रेंड में नजर आ रहे हैं
अपडेटेड Mar 06, 2021 पर 09:09  |  स्रोत : Moneycontrol.com

फरवरी में 6 फीसदी की बढ़त के साथ बंद होने के बाद अब सवाल यह है कि मार्च में भारतीय बाजारों का रुख क्या होगा। जानकारों का कहना है कि मार्च में भी बाजारों में तेजी बनी रहेगी। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। हालांकि यूएस बॉन्ड यील्ड में बढ़त  और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल खेल बिगाड़ने का काम कर सकते हैं।


AceEquity के पिछले 10 साल के आकंड़ों पर नजर डालें तो मार्च महीने में दलाल स्ट्रीट पर बुल और बियर की लड़ाई बराबर के स्तर की रही है। 10 में से 5 मामलों में बाजी बुल के हाथ में रही है वही 5 बार बेयर के हाथ जीत आई है।


जानकारों का कहना है कि बीच-बीच में आनेवाली गिरावट एक हेल्दी बुल मार्केट का हिस्सा है। लंबी अवधि के निवेशकों को किसी भी गिरावट में क्वालिटी शेयरों में खरीदारी करनी चाहिए। जानकारों का कहना है कि अच्छी बात यह है कि बाजार अपट्रेंड में नजर आ रहे हैं। जब तक इंडिया इंक का प्रदर्शन अच्छा है और माइक्रो और मेक्रो आंकडे़ मजबूत बने हुए हैं अधिकांश गिरावट में खरीद देखने को ही मिलेगी।


पिछले मार्च में बाटम आउट होने के बाद से निफ्टी में शानदार बढ़त देखने को मिली है और यह लगातार हायर हाई और हायर लो बनाता रहा है।


FYERS के Abhishek Chinchalkar ने मनीकंट्रोल से बात करते हुए कहा कि इस बुल के मार्केट के अंदर हमें 4 बड़े प्राइस करेक्शन देखने को मिले हैं। ये करेक्शन 7-11 फीसदी के बीच रहे हैं। अगर इनका एवरेज निकाला जाए तो यह 9.5 फीसदी रहा है। 15,431 के रिकॉर्ड हाई से आया सबसे ताजा करेक्शन 6 फीसदी से कुछ ज्यादा रहा है। पिछले 10 महीनों के औसत करेक्शन और कैडल सेटअप के सक्ट्रक्चर को देखते हुए निफ्टी में नीचे की तरफ 14,300/13,800 की स्तर के संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


Abhishek Chinchalkar ने आगे कहा कि इन सब के बावजूद बाजार का ओवरऑल अपट्रेंड मजबूत बना हुआ है और इसी तरह की गिरावटों को मीडियम टर्म के लिए खरीद का मौका समझना चाहिए।


किन बातों पर रहें नजर


बाजार के लिए  US Treasury Yields में बढ़ोतरी एक नियर टर्म खतरा है लेकिन मार्च के महीने में  D-Street पर बुल्स का कब्जा आसान नहीं होगा क्योंकि फरवरी महीने में मजबूत ऑटो बिक्री आकंड़े, मजबूत जीएसटी कलेक्शन और दिसंबर तिमाही में इंडिया इंक का जोरदार प्रदर्शन बाजार को सपोर्ट देगा।


Kotak Securities की Rusmik Oza का कहना है कि हमें मार्च के महीने मे  बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा यूनियन बजट के बाद बाजार के लिए कोई बड़ा घरेलू ट्रिगर भी नहीं है ऐसी स्थित में बाजार ग्लोबल संकेतों के आधार पर चलेगा।


उन्होंने आगे कहा कि नियर फ्यूचर में बाजार की नजर इस बात पर बनी रहेगी कि अमेरिका  में राहत पैकेज पर क्या निर्णय लिया जाता है और क्या यूएस बॉन्ड यील्ड 1.5 फीसदी के स्तर को पार कर जाएगा। अब भारत के लिए क्रूड ऑयल की कीमतें भी काफी अहम होगी जिसपर बाजार की नजर रहेगी।


उन्होंने आगे कहा निफ्टी के लिए 14,428 के स्तर पर स्थित  50-DMA काफी अहम सपोर्ट लेवल है जिसपर नजर रखनी चाहिए। अगर निफ्टी इसके नीचे फिसलता है तो वह 14,000-13,600 के स्तर तक जा सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो निफ्टी के लिए नियर फ्यूचर में 14,500-15,500 का रेंज काफी अहम है इस पर हमें नजर रखनी चाहिए।


FIIs एंड DII की गतिविधियां


विदेशी संस्थागत निवेशकों  ने मार्च 2020 में भारतीय बाजारों  से 60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाले थे। वहीं अब वे नेट बायर नजर आ रहे हैं। इसी तरह  मार्च महीने के आकंड़ों पर नजर डाले तो पिछले 10 साल में से 6 साल भारतीय बाजारों में DII की बिकवाली देखने को मिली है।


जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिका बॉन्ड यील्ड में बढ़त जारी रहती है तो हमें डेट मार्केट में कुछ दबाव देखने को मिल सकता है।


Bonanza Portfolio के  Vishal Wagh ने मनीकंट्रोल से बात करते हुए कि अगर  बॉन्ड यील्ड बढ़त  होती है तो बॉन्ड मार्केट में एफआईआई फ्लो गिरता हुआ दिखेगा। इसके साथ ही महंगाई में बढ़ोतरी और ब्याज दरों में बढ़त की संभावनाएं भी दिखेगी।


FYERS के Abhishek Chinchalkar का कहना है कि हमें अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि यूएस बॉन्ड यील्ड का रुख किधर होगा । अगर शुक्रवार का रिवर्सल यूएस बांड यील्ड में नरमी लाता है तो बाजार में जोखिम घटेगा। उन्होंने आगे कहा कि  nominal US yields में बढ़त जारी रहती है और real US yields सकारात्मक होने की तरफ बढ़ती है तो हमें ग्लोबल बॉन्ड एंड इक्विटी मार्केट में बिकवाली का दूसरा दौर देखने को मिल सकता है।


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