इंफोसिस के 25 साल, कैसा रहा सफर -
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इंफोसिस के 25 साल, कैसा रहा सफर

प्रकाशित Thu, 14, 2018 पर 10:48  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इंफोसिस के लिए आज बेहद खास दिन है। कंपनी अपनी सिल्वर जुबली मना रही है। 1993 में बनी इस दिग्गज आईटी कंपनी के लिए कैसा रहा 25 सालों का सफर आइए जानते हैं। इंफोसिस ने इन 25 सालों में काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। एन आर नारायणमूर्ति ने 1981 में 6 दोस्तों के साथ इंफोसिस की शुरुआत की। इंफोसिस 250 डॉलर की पूंजी के साथ पुणे में शुरुआत हुई। ये लिस्ट होने वाली पहली आईटी कंपनी थी।


इंफोसिस का आईपीओ फरवरी 1993 में आया और इसकी लिस्टिंग जून 1993 में हुई। ये आईपीओ अंडर सब्सक्राइब था और मॉर्गन स्टैनली ने इसे बचाया था। मॉर्गन स्टैनली 95 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 13 फीसदी शेयर खरीदकर बेल-आउट किया था। लिस्टिंग के दिन शेयर 60 फीसदी ऊपर 145 रुपये के भाव पर खुला था। आज इसकी लिस्टिंग के 25 साल पूरे हो गए हैं।


इंफोसिस 1999 में नैस्डैक पर लिस्ट होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी। कंपनी ने कॉरपोरेट गवर्नेंस और डेटा डिस्क्लोजर का खास खयाल रखा। इंफोसिस कर्मचारियों के साथ अपनी कमाई बांटने वाली पहली कंपनी है। इसने ही सबसे पहले गाइडेंस देना शुरू किया। कंपनी ने सबसे पहले यूएस जीएएपी अकाउंट पब्लिश किया। इंफोसिस ने काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। इंफोसिस ने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। आईपीओ के वक्त लगाए गए महज 95 रुपये आज 6.46 लाख रुपये बन गए हैं। आईपीओ के वक्त लगाए गए 9500 रुपये आज 6.46 करोड़ रुपये हो गए हैं।


आईटी दिग्गज इंफोसिस के 25 साल पूरे होने पर एनाम सिक्योरिटीज के चेयरमैन वल्लभ भंसाली का कहना है कि इंफोसिस ने पिछले पच्चीस सालों में देश के कॉरपोरेट सेक्टर को पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।


25 सालों में इंफोसिस ने अपने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। लिस्टिंग से अब तक कंपनी ने 6800 गुना रिटर्न दिया है। बीएसई के मेंबर रमेश दमानी कहते हैं कि इंफोसिस की लिस्टिंग से नए निवेशक बाजार में आए।