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बाटा की लिस्टिंग के 46 साल, ₹30000 के निवेश ने बनाया करोड़पति

आज कहानी शू किंग बाटा की। कहने को ये MNC कंपनी है लेकिन इसका दिल है पूरा हिंदुस्तानी।
अपडेटेड Jun 26, 2019 पर 10:10  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आज कहानी शू किंग बाटा की। कहने को ये MNC कंपनी है लेकिन इसका दिल है पूरा हिंदुस्तानी। करीब 90 साल पहले देश में इस ब्रांड ने कदम रखा। ये वो दौर था जब हम जापान से जूते मंगवाया करते थे। राजकपूर का वो गाना मेरा जूता है जापानी आपको याद ही होगा। लेकिन धीरे-धीरे BATA देश के मिडल क्लास का फेवरेट शू बना गया। इसकी लिस्टिंग के 46 साल पूरे हो चुके है और इसी मौके पर हम ये खास आयोजन कर रहे हैं।


बाटा की लिस्टिंग जून 1973 में हुई। इसका आईपीओ 30/शेयर के भाव पर आया था। बाटा चेक रिपब्लिक देश की कंपनी है। थॉमस बाटा ने 1894 में इसकी शुरुआत की थी। कंपनी रबर और चमड़े की खोज भारत लाई। 1939 में कोलकाता से कंपनी का कारोबार शुरू हुआ। बाटानगर में देश की पहली शू मशीन लगाई गई। आज भारत बाटा का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है।


बाटा के देश में 1375 रिटेल स्टोर हैं जिसमें 8500 कर्मचारी काम करते हैं। इस साल कंपनी ने 5 करोड़ जूते बेचे है। 90 देशों में कंपनी का कामकाज है। इसके कुल 30000 कर्मचारी और 5000 स्टोर हैं। रोजाना 10 लाख ग्राहक कंपनी के स्टोर में आते हैं।


बाटा शानदार सफर का साथी रहा है। जून 1973 में इसमें किया गया 30000 रुपये का निवेश आज करीब 1 करोड़ रुपये हो गए। कंपनी के जून 1973 के 1000 शेयर शेयर स्प्लिट और बोनस के चलते 2015 तक 7000 शेयर हो गए हैं। कंपनी ने 3 बार दिया राइट्स इश्यू भी दिया है। इस शेयर ने 46 साल में 333 गुना रिटर्न दिया है।