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Adani Group की कंपनियों के Shares धड़ाम होने की वजह एनालिस्ट कवरेज कम होना तो नहीं? जानें क्यों कम है कवरेज

Adani group की कंपनियों के शेयर में आई लगातार इस जबरदस्त गिरावट की एक बड़ी वजह ग्रुप की कंपनियों का बेहद कम या न के बराबर एनालिस्ट कवरेज होना है
अपडेटेड Jun 20, 2021 पर 09:45  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अडाणी ग्रुप (Adani group) की कंपनियों के स्टॉक्स इस सप्ताह एक फर्जी खबर के कारण धड़ाम हो गए। Adani group और NSDL का तरफ से यह बात साफ हो गई कि ग्रुप की कंपनियों में निवेश करने वाले FPIs का अकाउंट फ्रीज नहीं हुआ है, इसके बावजूद कंपनी के शेयर पिछले सोमवार से लेकर शुक्रवार तक हर रोज गिरे और इस दौरान लगभग हर रोज Adani group  की कंपनियों में लोअर सर्किट लगा।

Adani group की कंपनियों के शेयर में आई लगातार इस जबरदस्त गिरावट की एक बड़ी वजह ग्रुप की कंपनियों का बेहद कम या न के बराबर एनालिस्ट कवरेज होना है। Adani group के स्टॉक्स धड़ाम होने से इन कंपनियों की एनालिस्ट कवरेज बहुत कम होने पर एक बार फिर ध्यान गया है।

इनवेस्टर्स को जानकारी वाले फैसले लेने में एनालिस्ट्स की रिपोर्ट से काफी मदद मिलती है। किसी कंपनी की एनालिस्ट्स की ओर से कवरेज कम या बिल्कुल नहीं होने से उसकी खराब क्वालिटी का संकेत मिलता है। साथ ही यह संकेत भी जाता है कि कंपनी में Genuine इंवेस्टर्स का इंटरेस्ट कम है।

कैपिटल मार्केट से जुड़ी जानकारियों को ट्रैक करने वाली Trendlyne के डेटा से पता चलता है कि अडाणी ग्रीन एनर्जी की कोई कवरेज नहीं होती। Adani Enterprises पर केवल दो ब्रोकरेज फर्मों ICICI Securities और HDFC Securities की रिसर्च रिपोर्ट उपलब्ध हैं। Adani Total Gas को केवल Monarch Networth Capital और ICICI Securities ट्रैक करती हैं।

अडाणी ग्रुप की कंपनियों में से केवल Adani Ports ऐसी है जिसकी कवरेज में ब्रोकरेज फर्मों की काफी दिलचस्पी है। इसे दो दर्जन से अधिक ब्रोकरेज फर्में ट्रैक करती हैं, लेकिन इसके शेयर में इसके बावजूद गिरावट आई है। यह अपने आप में शॉकिंग है क्योंकि Adani Group की 6 कंपनियों का m-cap करीब 8 लाख करोड़ रुपये है।

Adani Green Energy का मार्केट कैप 1.74 लाख करोड़ रुपये है और यह बीएसई पर 22वीं सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनी है। Adani Enterprises लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ 28वें स्थान पर है। इसके बाद Adani Total Gas, Adani Transmission और Adani Ports & Special Economic Zone हैं।

अडाणी ग्रुप के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर जुगेशिंदर सिंह ने हाल ही में CNBC-TV18 को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि ग्रुप की कुछ कंपनियों की शुरुआत कुछ वर्ष पहले ही हुई है और इनकी एनालिस्ट कवरेज आने वाले समय में बढ़ जाएगी।
उनका कहना था, हम चाहें तो एनालिस्ट्स से कवरेज करवा सकते हैं। हम उनके पीछे नहीं जाते। हमारे पास अच्छा कैश फ्लो है। स्ट्रैटेजिक इनवेस्टर्स ने फंड लगाया है। ऐसे इनवेस्टर्स ड्यू डिलिजेंस करने के बाद ही किसी कंपनी में  इनवेस्टमेंट करते हैं।

हालांकि, उनके इस तर्क में दम नहीं दिखता बहुत सी कंपनियां पिछले कुछ वर्षों में ही लिस्ट हुई हैं और उन्हें कई ब्रोकरेज फर्में ट्रैक करती हैं। इसका एक उदाहरण पॉलीकैब इंडिया है जिसकी लिस्टिंग दो वर्ष पहले हुई थी और इसे 10 ब्रोकरेज फर्मों की ओर से कवर किया जाता है। Varroc Engineering का इनिशियल पब्लिक ऑफर तीन वर्ष पहले आया था और इसे आठ ब्रोकिंग फर्में ट्रैक करती हैं। इन कंपनियों का साइज भी अडाणी ग्रुप की कंपनियों की तुलना में काफी कम है।

कम फ्री फ्लोट है कारण

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अडाणी ग्रुप की कंपनियों की एनालिस्ट कवरेज कम होने का एक बड़ा कारण इनका फ्री फ्लोट अधिक नहीं होना है। कम फ्री फ्लोट का मतलब है कि प्रमोटर्स के पास कंपनी में अधिक हिस्सेदारी है जिससे फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स या डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स यानी इंश्योरेंस कंपनियों और म्यूचुअल फंड्स जैसे इनवेस्टर्स के लिए कम शेयर्स बचते हैं।

इतनी है प्रमोटर्स की हिस्सेदारी

Adani Green Energy में प्रमोटर्स के पास 74.9 प्रतिशत हिस्सेदारी कई तिमाहियों तक रही थी और इस वर्ष मार्च क्वार्टर में यह घटकर 56.3 प्रतिशत पर आई है। Adani Enterprises और Adani Transmission दोनों में प्रमोटर के पास 74.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि Adani Total Gas और Adani Ports में यह आंकड़ा क्रमशः 74.8 प्रतिशत और 63.7 प्रतिशत का है।

हाई वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे शेयर्स

इसके अलावा Adani Group लगातार अपनी कंपनियों की रीस्ट्रक्चरिंग करती है। इस वजह से भी निवेशक कंपनी से दूरी बनाकर रखते हैं। साथ ही ब्रोकरेज फरम्स को भी इनके कवरेज में वैल्यू नजर नहीं आता। CapitalVia Global Research  के गौरव गर्ग का कहना है कि अडाणी ग्रुप के शेयर का वैल्यूएशन कापी हाई है और ये 100x PE से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। साथ ही कंपनी पर 1.5 ट्रिलियन का भारी-भड़कम कर्ज है। 

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