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चीन विरोध का उफान सिर्फ सोशल मीडिया पर, कारोबार पर नहीं पड़ेगा असर: Xiaomi India

शाओमी इंडिया के सीईओ मनु कुमार का कहना है कि शाओमी के सभी स्मार्टफोन और कंपनी के अधिकांश दूसरे प्रोडक्ट भारत में ही बने हुए है।
अपडेटेड Jun 25, 2020 पर 09:49  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोना के कहर और भारत और चीन के बीच एलएसी पर जारी तनाव के चलते देशभर में चीन विरोधी भावनाएं उफान पर हैं। देशभर में चीन में बने सामानों और फोन के बायकॉट को लेकर आदोलन चल रहे हैं। हालांकि इस बीच शाओमी इंडिया के चीफ मनु कुमार जैन का मानना है कि यह चाइना विरोधी भावनाएं सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक की सीमित हैं। इससे कंपनी के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।


CNBC-TV18 के साथ एक इंटरव्यू में मनु जैन ने कहा कि शाओमी किसी दूसरी ब्रॉन्ड की तुलना में अधिक भारतीय है। पिछले 6 वर्षों के दौरान कंपनी ने अपनी एक बड़ी RnD मैन्यूफैक्चरिंग और प्रोडक्शन टीम भारत में बनाई है और करीब 50,000 लोगों को रोजगार दे रही है।


मनु जैन ने आगे कहा कि शाओमी के सभी स्मार्टफोन और उसके दूसरे अधिकांश प्रोडक्ट भारत में ही बनाए गए हैं। इसके अलावा इन प्रोडक्टों के लिए जरुरी करीब 65 फीसदी कलपुर्जे भारत के ही बने हुए हैं।


उन्होंने आगे कहा कि देश में ऐसी कंपनियां है जिनके फोन शतप्रतिशत चाइना में बने हुए हैं लेकिन उनपर भारतीय कंपनी का ठप्पा लगा हुआ है। ये कंपनियां चीन से बने बनाए फोन खरीद कर यहां उनकी री-ब्रॉन्डिंग करके बेचती हैं।


उन्होंने आगे कहा कि हम किसी दूसरी कंपनी के तुलना में कही ज्यादा भारतीय कंपनी हैं। मनु जैन ने इस बात की उम्मीद जताई कि सीमा पर चल रहे भारत और चीन के बीच तनाव का कंपनी के भारतीय कारोबार पर असर नहीं पड़ेगा। उनके शब्दों में अगर कहें तो मैं इस बात को समझता हूं कि देश में सोशल मीडिया पर चाइना विरोध की भावनाएं उफान पर हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि कंज्यूमर इससे प्रभावित नहीं होगा।
 
मनु जैन ने आगे कहा कि शाओमी भारत में सबसे ज्यादा कर चुकाने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है और यह बड़ी मात्रा में लोगों को रोजगार देती है। उन्होंने कहा कि कंपनी के हालही में लॉन्च किए प्रोडक्ट्स की रिकॉर्ड बिक्री देखने को मिली। अगर चाइना विरोधी भावनाओं का असर होता तो हम 1 लाख से ज्यादा Redmi Earbuds नहीं बेच पाए होते। बेस्ट सेलिंग ब्रॉड इस तरह के आंकड़े एक तिमाही में हासिल कर पाते हैं जबकि  हमने यह उपलब्धि सिर्फ एक सप्ताह में हासिल की है।


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