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पीएम मोदी RCEP में शामिल नहीं हुए, लेकिन पनगढ़िया को पसंद है RCEP, जानिए वजह

पनगढ़िया ने इंडियन इकोनॉमी की कमजोर ग्रोथ की दो वजहें बताईं, जानिए क्या?
अपडेटेड Nov 12, 2019 पर 12:04  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Regional Comprehensive Economic Partnership (RCEP) को लेकर नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया का कहना है कि भारत को इससे जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके जरिए देश ज्यादा लिबरल ट्रेड पॉलिसी अपना सकता है जिससे एक्सपोर्ट्स को बढ़ावा मिलेगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने कुछ दिनों पहले ही RCEP में जुड़ने का प्रस्ताव खारिज करते हुए कहा था कि यह देश के हित में नहीं है। हालांकि इस मामले में पनगढ़िया की राय बिल्कुल अलग है।


CNBC-TV18 से बात करते हुए पनगढ़िया ने कहा कि RCEP बहुत बड़ा ग्रुप है। अगर कोई देश इन 15 देशों को निर्यात करता है तो उसे बहुत ज्यादा शुल्क देना होगा।


उन्होंने कहा, "RCEP एक बहुत बड़ा ग्रुप है और हम इससे बाहर रहना अफोर्ड नहीं कर सकते हैं। इन 15 देशों को एक्सपोर्ट करने पर हमें ज्यादा शुल्क चुकाना होगा जबकि ग्रुप में शामिल होने पर एक्सपोर्ट शुल्क इतना ज्यादा नहीं होगा। लिबरल ट्रेड पॉलिसी का दौर शुरू करने के लिए यह अच्छा तरीका है।"


पनगढ़िया के मुताबिक, इंडिया की ग्रोथ घटने की दो सबसे अहम वजह है। उन्होंने कहा, "पहला, बैंका का NPA है। इससे दुरुस्त करना जरूरी है। क्रेडिट ग्रोथ जितना बढ़ना चाहिए, उतना नहीं बढ़ रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि कंपनियों की हालत अच्छी नहीं है। वे जानते हैं कि उनका कारोबार जैसे चल रहा था वैसा अभी नहीं है। इसके अलावा दूसरी वजह पीएम मोदी की एंटी करप्शन उपाय हैं। इसकी वजह से कारोबार करना मुश्किल हुआ है।"


उन्होंने कहा, व्यक्तिगत तौर पर मैं सकारात्मक हूं। इसमें 6 महीने या 1 साल का वक्त लग सकता है। अगर आप 2020-21 को देखेंगे तो उम्मीद है कि इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ 7.5 फीसदी हो सकती है। 


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