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AT1 Bonds केस में SEBI ने Yes Bank पर लगाया 25 करोड़ रुपये का जुर्माना, जानें क्या है मामला

ग्राहकों को अंधेरे में रखकर एडिशनल टियर 1 बॉन्ड बेचने के मामले में SEBI ने Yes Bank पर 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है
अपडेटेड Apr 13, 2021 पर 07:44  |  स्रोत : Moneycontrol.com

ग्राहकों को अंधेरे में रखकर एडिशनल टियर 1 बॉन्ड (AT1 Bonds) बेचने के मामले में मार्केट रेगुलेटर SEBI ने प्राइवेट लेंडर Yes Bank पर 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। SEBI ने Yes Bank को जुर्माने की यह राशि 45 दिनों के अंदर जमा कराने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि Yes Bank के एग्जीक्यूटिव्स ने निवेशकों को AT1 Bonds धोखा देकर बेचा था।

AT1 Bonds को Super FD कहते हुए यस बैंक के एग्जीक्यूटिव्स ने इसे निवेशकों को बेचा था और कहा था कि इस पर उन्हें 9% से अधिक रिटर्न मिलेगा। लेकिन बैंक के एग्जीक्यूटिव्स ने इस बॉन्ड से जुड़े रिस्क के बारे में निवेशोकों के कुछ नहीं बताया था। जब बैंक की स्थिति खराब हुई तो रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम के तहत Yes Bank ने 8415 करोड़ रुपये के AT1 Bonds को राइट-ऑफ कर दिया, जिससे इसके निवेशकों का पूरा पैसा डूब गया।

आपको बता दें कि Yes Bank के एडिशनल टियर 1 (AT1) बॉन्डहोल्डर्स ने बैंक से 160 करोड़ रुपये की राहत पाने के लिए फरवरी में बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay HC) का दरवाजा खटखटाया। Bombay HC ने इस मामले में संबंधित सभी पक्ष को 26 अप्रैल, 2021 को जवाब देने को कहा है।

यस बैंक ATI बॉन्डहोल्डर्स एसोसिएशन (Yes Bank AT1 Bondholders Association), जिसके 400 से अधिक सदस्य हैं, इस संस्था ने बैंक से अंतरिम राहत के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। इन लोगों ने Yes Bank के 160 करोड़ रुपये के ATI बॉन्ड खरीदे थे, जिसे Yes Bank ने SBI के बेलआउट पैकेज के तहत राइट-ऑफ (write-off) कर दिया था। इस राशि में इन बॉन्ड्स पर मिलने वाला इंटरेस्ट शामिल नहीं है।

यस बैंक ATI बॉन्डहोल्डर्स एसोसिएशन ने बॉम्बे हाईकोर्ट से अपील की है कि कोर्ट Yes Bank को कोर्ट के पास 160 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दे, ताकि बॉन्ड खरीदने वालों को हितों की रक्षा हो सके। यस बैंक के ATI बॉन्ड में निवेश करने वाले निमिश गोयल ने कहा कि कोर्ट ने इस मामले में रेस्पोंडेंट्स को 26 अप्रैल तक रिप्लाई करने का आदेश दिया है।

आपको बता दें कि मार्च, 2020 में मोरेटोरियम पर रखे जाने के बाद Yes Bank ने बेलआउट पैकेज के तौर पर 8415 करोड़ रुपये मूल्य का ATI बॉन्ड राइट-ऑफ कर दिया था। याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में Axis Trustee पर भी आरोप लगाया है कि उसने अयोग्य इंवेस्टर्स को ATI बॉन्ड बेचने से Yes Bank के रिप्रजेंटेटिव्स को नहीं रोका। संपर्क करने पर इस मामले में Axis Trustee ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है।

अपनी याचिका में ATI बॉन्डहोल्डर्स ने कहा है कि इसे खरीदने वाले 63% निवेशकों की उम्र 50 साल से अधिक है, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई इसे खरीदने में लगा दिया था। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि Yes Bank के रिप्रजेंटेटिव्स ने झूठ बोलकर यह बॉन्ड उन्हें बेचा और कहा यह Super FD है जिस पर 9 से 9.5% तक इंटरेस्ट मिलेगा। रिप्रजेंटेटिव्स ने इस बॉन्ड के रिस्क के बारे में एक शब्द भी नहीं बताया कि फाइनेंशियल क्राइसिस में इसमें लगाया गया पैसा डूब जाएगा।

Yes Bank के ATI बॉन्ड्स में कुछ निवेशकों ने 1 करोड़ रुपये से लेकर 1.5 करोड़ रुपये तक लगाया था। बॉन्डहोल्डर्स ने कहा कि RBI के रेगुलेशन का उल्लंघन करके Yes Bank के रिप्रजेंटेटिव्स ने झूठ बोलकर हमें यह बॉन्ड बेचा। आपको बता दें कि RBI बैंको को ATI बॉन्ड्स जिसे पर्पेचुअल भी कहते हैं, रिटेल इंवेस्टर्स को बेचने की इजाजत देता है, लेकिन इससे जुड़ा रिस्क भी निवेशकों को साफ-साफ बताने की नियम है।

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