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Bhushan Power and Steel को खरीदने के लिए JSW स्टील की शर्तों को लेनदारों से मिली मंजूरी, 31 मार्च तक हो सकती है डील

CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, लेनदारों ने BPSL के अधिग्रहण के लिए JSW Steel की शर्तों पर भी अपनी सहमति दे दी है
अपडेटेड Mar 06, 2021 पर 12:02  |  स्रोत : Moneycontrol.com

प्रमोटर्स पर करोडों रुपये के घोटाले का आरोप लगने के बाद दिवालिया हो चुकी स्टील कंपनी भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (BPSL) के कमिटी ऑर क्रेडिटर्स यानी लेनदारों ने जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel) के 19,700 करोड़ रुपये में BPSL के अधिग्रहण के प्रस्ताव के समर्थन में वोटिंग की है। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, लेनदारों ने BPSL के अधिग्रहण के लिए JSW Steel की शर्तों पर भी अपनी सहमति दे दी है। इसके लिए आज वोटिंग हुई थी। इस वजह से वर्षों से दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही भूषण पावर एंड स्टील कंपनी का अधिग्रहण 31 मार्च 2021 तक हो जाने की उम्मीद है।

भूषण स्टील के लेनदारों ने JSW Steel के उस शर्त को मान ली है जिसमें JSW Steel ने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस डील को रद्द कर देता है तो BPSL के कमिटी ऑर क्रेडिटर्स उनका पूरा पैसा लौटा देंगे। साथ ही इस डील की जो 19,700 करोड़ रुपये की राशि है वह एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) में रखी जाएगी, जब तक कि इस मामले में कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता। आपको बता दें कि एस्क्रो अकाउंट ऐसा थर्ड पर्सन अकाउंट होता है जो डील के दो पार्टनर्स के बीच पुल का काम करता है। इस खाते में जमा पैसा डील नहीं होने का स्थिति में खरीदार को वापस हो जाती है।

CNBC-TV18  की रिपोर्ट के मुताबिक, JSW Steel ने पिछले शुक्रवार को भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड के लेनदारों से कहा था कि वह दो सप्ताह के अंदर डील की पूरी रकम (Escrow Account) में जमा करने को तैयार है। आपको बता दें कि JSW Steel से जो 19,700 करोड़ रुपये की राशि मिलेगी, उससे लेनदारों को उनका 41% कर्ज वापस मिल जाएगा, जो उन्होंने भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड को दिया है। BPSL पर SBI का 9825 करोड़, PNB का 4399 करोड़, ARCE ARC का 5257 करोड़ और केनरा बैंक का 2244 करोड़ रुपये बकाया है।

ये है पूरा मामला


कर्ज में डूबने के बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 26 जुलाई 2017 को भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत JSW स्टील ने 19,700 करोड़ रुपए में इसे खरीदने की प्रस्ताव दिया। इसके बाद सितंबर 2019 में NCLT ने भूषण स्टील को खरीदने के लिए JSW स्टील के 19,700 करोड़ रुपए के प्रस्ताव मंजूरी दे दी। साथ ही NCLT ने यह भी कहा कि BPSL के पूर्व प्रमोटरों के खिलाफ पैसों के हेर-फेर के मुकदमों का JSW स्टील पर असर नहीं पड़ेगा और दिवालिया प्रक्रिया के दौरान BPSL ने जो मुनाफा कमाया, उसे भूषण स्टील के कर्जदाताओं में बांटा जाएगा। NCLT के इस फैसले के खिलाफ ED सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई।

NCLT के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची ED

ED का कहना था कि 47 हजार करोड़ रुपये के बैंक कर्ज घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालस ने भूषण स्टील की जो संपत्ति अटैच की है, उसके अधिग्रहण की मंजूरी देने का अधिकार NCLT के पास नहीं है। ED ने भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड की 4025 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है। वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने NCLT के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया, जिसमें JSW स्टील को 19,700 करोड़ रुपये में भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड का अधिग्रहण करने की अनुमति दी गई थी और उसे ED के मुकदमे से छूट भी दी गई गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस बिक्री पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। ED ने भूषण स्टील के पूर्व सीएमडी संजय सिंघल को ही इस कर्ज घोटाले का मास्टरमाइंड करार दिया था। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है।

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