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BPCL को निजी हाथों में सौंपने का रास्ता हुआ साफ, सरकार बेचेगी अपनी पूरी हिस्सेदारी

BPCL की नेटवर्थ फिलहाल 55,000 करोड़ रुपये है। सरकार अपनी पूरी 53.3 फीसदी हिस्सेदारी बेचना चाहती है।
अपडेटेड Oct 07, 2019 पर 08:49  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Bharat Petroleum Corp (BPCL) को निजी करण करने के लिए मोदी सरकार ने रास्ता साफ कर दिया है। सरकार ने गुपचुप तरीके से उस कानून को खत्म कर दिया है, जिस कानून से कंपनी का राष्ट्रीयकरण हुआ है। ऐसे में कंपनी निजी हाथों में बेचने के लिए संसद से मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी।


दरअसल मोदी सरकार ने Repealing and Amending Act को साल 2016 में ही खत्म कर दिया था। जिसमें 187 अप्रचलित और निरर्थक कानून रद्दी की टोकरी में चले गए।
इस मामले से जुड़े एक सीनियर ऑफिसर का कहना है कि इस कानून को पहले ही खत्म कर दिया गया है और BPCL की रणनीतिक बिक्री के लिए संसद की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। BPCL में सरकार अपनी 53 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इसके लिए सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। नंबर के पहले हफ्ते में सरकार निविदा निकालेगी, जिसके बाद प्रॉसेस शुरु हो जाएगा।


BPCL की नेटवर्थ फिलहाल 55,000 करोड़ रुपये है। सरकार अपनी पूरी 53.3 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 60,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की तैयारी कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2003 में फैसला दिया था कि BPCL और HPCL का निजीकरण सरकार द्वारा कानून में संशोधन के बाद ही किया जा सकता है। संसद ने ही पूर्व में दोनों कंपनियों के राष्ट्रीय करण के लिए कानून पारित किया था। वैसे कोर्ट के इस निर्देश से पहले अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली NDA  सरकार ने दोनों कंपनियों के निजीकरण की योजना बनाई थी। तब कोर्ट के निर्देश के बाद HPCL में सरकार की अपनी 51.1 फीसदी हिस्सेदारी में से 34.1 फीसदी हिस्सा बेचने की योजना रुक गई थी। उस समय Reliance Industries, UK की BP PLc, कुवैत पेट्रोलियम, मलेशिया की Petronas, Shell-Saudi Aramco गठजोड़ और Essar Oil ने HPCL में हिस्सेदारी लेने की इच्छा जताई थी। 


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