Moneycontrol » समाचार » कंपनी समाचार

सस्ती हुई कोरोना की दवा, Glenmark ने 27 फीसदी घटाई कीमत, 1 गोली 75 रुपये की

ग्‍लेनमार्क ने भारत में कोरोना रोगियों पर Favipiravir (FabiFlu) का तीसरे चरण का क्‍लीनिकल ट्रायल भी पूरा कर लिया है
अपडेटेड Jul 14, 2020 पर 09:05  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोना वायरस का प्रकोप पूरी दुनिया में फैलने के बाद सभी देश इसके इलाज के लिए दवाइयों की खोज में जुट गए। जो दवाइयां बाजार में उतारी गईं, उनकी कीमत ज्यादा है। जबकि पूरी दुनिया कोरोना वायरस के चपेट में है। ऐसे में सभी लोगों तक दवाइयों की पहुंच बनाने के लिए कोरोना दवा बनाने वाली फार्मा कंपनी ने दाम घटा दिए हैं।


दवा कंपनी ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स (Glenmark Pharmaceuticals) ने सोमवार को कहा कि उसने अपनी एंटीवायरल दवा फेविपिराविर (Favipiravir) की कीमत 27 फीसदी कम करके 75 फीसदी कर दिया है। कंपनी की यह दवा फेबिफ्लू (FabiFlu) ब्रांड के नाम से बाजार में उतारी गई थी। बता दें कि पिछले महीने कंपनी ने इस दवा को बाजार में उतारा था, उस समय इसकी एक टैबलेट की कीमत 103 रुपये थी।


रेग्युलेटर फाइलिंग में Glenmark ने कहा कि उसने अपनी दवा FabiFlu के दाम 37 फीसदी कम कर दिए हैं। अब इसका रिटेल प्राइस (Maximum Retail Price - MRP) 75 रुपये प्रति टैबलेट होगा।


कंपनी ने कहा कि ज्यादा फायदे और बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन के कारण दवा की कीमत में कमी संभव हो पाई है। दवा का एक्टिव फार्मास्‍युटिकल इंग्रेडिएंट (active pharmaceutical ingredient - API) और अंतिम उत्‍पाद (Formulation) तैयार किया जा रहा है। इस सबका फायदा भारत में कोरोना के मरीजों को दिया जा रहा है।


ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स (Glenmark Pharmaceuticals) के वाइस प्रेसीडेंट और इंडिया के बिजनेस हेड आलोक मलिक (Alok Malik) ने कहा कि हमारे इंटरनल रिसर्च से पता चलता है कि हमने इंडियन मार्केट में फेबीफ्लू (Fabiflu) नाम से एक सबसे सस्ती दवा उतारी है। जबकि अन्य देशों में Favipiravir नाम से जो दवा बाजार मे उतारी है वो काफी महंगी है। इसकी कीमत में की गई कमी के बाद हमें उम्मीद है कि भारत में Fabiflu कोरोना वायरस संक्रमित हर मरीज को आसानी से मुहैया हो सकेगी। आगे उन्होंने कहा कि कंपनी ने एक पोस्ट मार्केचिंग सर्विलांस स्टडी (post-marketing surveillance - PMS)  के जरिए Fabiflu को कोरोना के मरीजों पर असर और सुरक्षा पर स्टडी किया है। इसके लिए 1000 ऐसे मरीजों को शामिल किया है, जिन्हें इलाज के दौरान Fabiflu दवा दी गई थी। मलिक ने कहा कि हमारी इस स्टडी से कोविड-19 के इलाज में फैबीफ्लू को बड़े पैमाने पर इस्‍तेमाल करने में डॉक्‍टरों को काफी मदद मिलेगी।  


बता दें कि बता दें कि ग्‍लेनमार्क ने 20 जून 2020 को बताया था कि उसे भारत के ड्रग रेग्युलेटर (Indias drug regulator) से फैबीफ्लू की मैन्‍युफैक्‍चरिंग और मार्केटिंग की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद उसने कोविड-19 के मॉडरेट पेशेंट्स के इलाज में इस्‍तेमाल होने वाली दवा का भारत में प्रोडक्शन शुरू कर दिया था। ग्‍लेनमार्क ने भारत में कोरोना रोगियों पर Favipiravir (FabiFlu) का तीसरे चरण का क्‍लीनिकल ट्रायल (3 clinical trial) भी पूरा कर लिया है।  इसके नतीजे बहुत जल्‍द सार्वजनिक किए जाएंगे।


सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।