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Coronavirus का असर: चीन की सुस्ती का भारत की इकोनॉमी पर क्या असर है?

बाजार के जानकारों का कहना है कि शेयर बाजार पर इसका लॉन्ग टर्म नुकसान नहीं होगा और बाजार जल्दी उबर जाएगा
अपडेटेड Feb 19, 2020 पर 09:35  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Coronavirus (कोरोनावायरस) से दुनिया भर में 60,000 से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। चीन में इस वायरस की वजह से 1400 लोगों की मौत हो चुकी है। इससे होने वाली मौतें 2002-03 में SARC से होने वाली मौतों से आगे निकल चुकी हैं। WHO (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन) ने आधिकारिक तौर पर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी का ऐलान कर दिया है। इस वायरस की वजह से अभी तक 25 देशों के लोग संक्रमित हो चुके हैं। इसका ट्रेड पर बुरा असर हुआ है।


चीन में कमोडिटी की कीमतें कम हो गई हैं। इसका असर धीरे-धीरे अब भारतीय कंपनियों पर भी होगा। भारत चीन का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। भारत के कुल इंपोर्ट का करीब 14 फीसदी चीन से आता है। चीन की इकोनॉमिक एक्टिविटी में अगर कोई लॉन्ग टर्म डिसरप्शन आता है तो वहां के शेयर बाजार को और झटका लग सकता है। मौजूदा हालात को देखते हुए सिटी ने चीन की इकोनॉमी की ग्रोथ का अनुमान 5.8 फीसदी से घटाकर 5.5 फीसदी कर दिया है।  
 
हालांकि बाजार के जानकारों का कहना है कि शेयर बाजार पर इसका लॉन्ग टर्म नुकसान नहीं होगा। SARC, स्वाइन फ्लू, इबोला जैसी बीमारियों का मार्केट पर असर हुआ है लेकिन फिर इसमें तेजी से सुधार भी हुआ।


चीन की इस बदहाली में भारत के लिए सुनहरा मौका है। चीन में आर्थिक गतिविधिया थमने से क्रूड प्राइस के दाम गिर गए हैं। क्रूड के दाम जिस लेवल पर आ गए हैं उस पर वह 2018 के बाद तक नहीं पहुंचे थे। इस साल जनवरी के अपने पीक से क्रूड के दाम 25 फीसदी गिर चुके हैं। ऐसे समय में जब भारत में महंगाई लगातार बढ़ रही है तब सस्ते क्रूड से काफी राहत मिल सकती है।


कई सेक्टर्स में उथलपुथल


चीन की फैक्ट्रीज में कामकाज ठप पड़ने से भारतीय कंपनियों को सप्लाई नहीं हो पा रही है। अगर यह लंबा खींचा तो नियर टर्म में यह भारत के लिए भी चुनौती बन सकती है। चीन से सप्लाई ना आने के कारण इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स, नॉन-इलेक्ट्रिकल मशीनरी एवं मशीन टूल्स, मेटल प्रोडक्ट्स, ऑर्गेनिक केमिकल और फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट की कमी हो रही है। ऐसे में भारतीय कंपनियों को किसी और बाजार की तलाश करनी होगी।


इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, फार्मा कंपनियों के पास बड़ी इनवेंटरी होती है, लिहाजा उनका काम कुछ दिनों के लिए चल जाएगा लेकिन इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट कंपनियों की परेशानी फिलहाल कम नहीं होगी। फार्मा कंपनियों की तरह इनके पास लंबे समय के लिए इनवेंटरी नहीं होती है।
टीवी में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स की 70 फीसदी और मोबाइल फोन में यूज होने वाले कंपोनेंट्स का 80 फीसदी इंपोर्ट चीन से होता है।


चीन में कंस्ट्रक्शन थमने से स्टील, एल्यूमीनियम और कॉपर की कीमतों में नरमी बनी हुई है। ग्लोबल मार्केट में पहले ही मेटल प्राइस की कीमतें थम गई हैं।


चीन में कामकाज ठप होने से पेंट और प्लास्टिक कंपनियों को फायदा हो रहा है। क्रूड प्राइस के दाम गिरने से इन कंपनियों की लागत घट गई है।


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