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डीबीजी इस्टेट कंपनी ने महाराष्ट्र में किया 1 हजार करोड़ का निवेश, बनायेगी लॉजिस्टिक पार्क

डीबीजी इस्टेट कंपनी एमेजॉन, फ्लिपकार्ट आदि कंपनियों के लिए लॉजिस्टिक पार्क तैयार करने वाली है। ये कंपनी भिवंडी में लॉजिस्टिक सेक्टर में काम करने वाली है।
अपडेटेड Jun 26, 2020 पर 10:06  |  स्रोत : Moneycontrol.com

महाराष्ट्र सरकार राज्य में निवेश बढ़ाने और नये निवेश लाने के लिए निवेशकों से लगातार संपर्क कर रही है। सरकार के इन प्रयासों को सफलता भी मिलती दिख रही है। निवेश बढ़ाने के सरकार के प्रयास के चलते पिछले हफ्ते में राज्य में 16 हजार करोड़ के निवेश का करार किया गया। इसके बाद बुधवार को सरकार के उद्योग विभाग ने राज्य में 1 हजार 17 करोड़ रुपये के निवेश के लिए के लिए और दो करार किये हैं।


बुधवार को हुए दो नये करारों में पहला करार प्रसिद्ध डीबीजी इस्टेट कंपनी के साथ किया गया है जिसमें कंपनी 900 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस निवेश के चलते राज्य में करीब 2700 नौकरियां पैदा होंगी जिससे बेरोजगारों को राहत मिलेगी। दूसरी तरफ जापान की आईडीएल केमी प्लास्ट के साथ भी सरकार ने 117 करोड़ रुपये का करार किया है। इससे सीधे तौर पर 88 लोगों को रोजगार मिलेगा।


इन दो करारों से राज्य के करीब 2800 लोगों को रोजगार प्राप्त होने की संभावना है। लोकसत्ता में छपी खबर के अनुसार इन कंपनियों से करार करते समय राज्य के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई, उद्योग विभाग के सेक्रेटरी वेणुगोपल रेड्डी, एमआईडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी अनबगसम और संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।


डीबीजी इस्टेट कंपनी एमेजॉन, फ्लिपकार्ट आदि कंपनियों के लिए लॉजिस्टिक पार्क तैयार करने वाली है। ये कंपनी भिवंडी में लॉजिस्टिक सेक्टर में काम करने वाली है। दूसरी तरफ जापान की आईडीएल केमी प्लास्ट कंपनी अहमदनगर जिले के सूपा में अपना उद्योग शुरू करने वाली है। उद्योग शुरू करने से पहले संबंधित कंपनी यहां के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देगी।


इस मौके पर उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने कहा कि राज्य के भूमिपुत्रों को रोजगार दिलाने के लिए लेबर बोर्ड की स्थापना की गई है। जो लोग औदयोगिक सेक्टर में काम करना चाहते हैं उन्हें इस लेबर बोर्ड की ओर से काम दिया जायेगा। इसके अलावा लेबर कमिश्नर को परप्रांतीय मजदूरों की जानकारी रखने को कहा गया है।


सुभाष देसाई ने आगे कहा कि पिछले हफ्ते चीनी कंपनी के साथ किया गया करार रद्द नहीं किया गया है। केंद्र सरकार की तरफ से चीन के साथ करार रोकने या नहीं करने की सूचना नहीं मिली है और चीन के साथ विवाद समाप्त होने पर उसका क्रियान्वयन किया जायेगा ऐसा उन्होंने स्पष्ट किया है।


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