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DEA ने पहले ही जताई थी IL&FS Crisis की आशंका, MCA को लिखी थी चिट्ठी

यह नोट मिलने के बाद ही MCA IL&FS का मैनेजमेंट टेकओवर करने की अपील के साथ NCLAT पहुंचा था
अपडेटेड Feb 17, 2020 पर 13:39  |  स्रोत : Moneycontrol.com

आर्थिक मामलों के विभाग (Department of Economic Affairs) ने  IL&FS (Infrastructure Leasing & Financial Services) के डूबने की आशंका को लेकर 30 सितंबर, 2019 को ही एक चिट्ठी लिखी थी। कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री (ministry of corporate affairs- MCA) ने एक ऐफिडेविट में बताया है कि DEA ने एक गोपनीय नोट में बताया था कि 91,000 करोड़ के कर्ज तले दबा IL&FS डूब सकता है और इससे इकोनॉमी पर बड़ा असर पड़ सकता है।


Economic Times की खबर के मुताबिक, मंत्रालय ने National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) के पास दाखिल किए गए एफिडेविट में बताया है कि इस चिट्ठी में कहा गया था कि अगर IL&FS ग्रुप डूब जाता है तो भारतीय अर्थव्यस्था को इसके नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं क्योंकि कर्जमाफी का दबाव बना रहेगा, ऋण बाजार में बिकवाली की आशंका है। इससे लिक्विडिटी क्रंच पैदा हो सकता है और NBFCs (non-banking financial companies) के लाइसेंस रद्द करने पड़ सकते हैं।


इसमें कहा गया था- IL&FS क्राइसिस के मद्देनजर कम से कम 1,500 छोटी NBFCs का लाइसेंस रद्द हो सकता है क्योंकि उसके पास पर्याप्त पूंजी नहीं थी।


यह नोट मिलने के बाद ही MCA, IL&FS का मैनेजमेंट टेकओवर करने की अपील के साथ NCLAT पहुंचा था।


DEA ने लिखा था- IL&F के बॉन्ड्स में 2,800 करोड़ का इन्वेस्ट करने वाली asset management companies (AMCs) पर उनके क्लाइंट्स की ओर से पैसा निकालने का दबाव बढ़ेगा। ऐसी mutual funds schemes में इतने कम वक्त में फंड इकट्ठा करना असंभव होगा। Corporate Debt Market में नकदी की कमी और DHFL एपिसोड से AMCs गवर्न्मेंट सिक्योरिटी बेचने पर मजबूर हो जाएंगी, जिससे गवर्नमेंट सिक्योरिटीज पर बिकवाली का भारी दबाव बढ़ेगा, इससे या तो Bond Yields 8.30-8.50 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा या फिर RBI को OMO (open market operations) का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा।


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