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MSMEs की परिभाषा बदली: ज्यादा निवेश-टर्नओवर वाली कंपनियां भी इस दायरे में

सीतारमण ने कहा, परिभाषा इसलिए बदली गई है ताकि उनका साइज बढ़ सके और उन्हें ज्यादा फायदा हो सके
अपडेटेड May 14, 2020 पर 10:14  |  स्रोत : Moneycontrol.com

फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने बताया कि MSMEs कंपनियों के लिए 3 लाख करोड़ रुपए का पैकेज लाया जाए रहा है। इस पैकेज का फायदा ज्यादा से ज्यादा कंपनियों को मिले इसलिए MSMEs की परिभाषा बदली गई है। सीतारमण ने कहा, परिभाषा इसलिए बदली गई है ताकि उनका साइज बढ़ सके और उन्हें ज्यादा फायदा हो सके। निवेश की सीमा से यह तय होता है कि कोई कंपनी MSMEs है या नहीं। अब सरकार इस सीमा को बढ़ा रही है।


क्या है नया बदलाव?


पहले जिस मैन्युफैक्चरिंग एंटरप्राइज में अधिकतम 25 लाख रुपए का निवेश होता था उसे माइक्रो या सूक्ष्म उद्योग मानते थे। सर्विस एंटरप्राइज के लिए यह सीमा 10 लाख रुपए तक थी। अब इस कैटेगरी की मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस एंटरप्राइज में निवेश की सीमा बढ़ाकर 1 करोड़ और टर्नओवर की सीमा बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दी गई है।


इसी तरह 5 करोड़ रुपए तक के निवेश वाले मैन्युफैक्चरिंग एंटरप्राइज स्मॉल इंडस्ट्री की कैटेगरी में आते थे। सर्विस सेक्टर की कंपनियों के लिए निवेश की सीमा 2 करोड़ रुपए थी। लेकिन अब दोनों का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब मैन्युफैक्चरिंग या सर्विस सेक्टर की अब निवेश की सीमा बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए तक और टर्नओवर की सीमा बढ़ाकर 50 करोड़ रुपए तक कर दी गई है।


मीडियम साइज या मझोले उद्योगों की बात करें तो पहले 10 करोड़ रुपए तक के निवेश वाले मैन्युफैक्चरिंग एंटरप्राइज इस कैटेगरी में आते थे। सर्विस एंटरप्राइज के लिए निवेश की सीमा 5 करोड़ रुपए थी। लेकिन अब इन दोनों की सीमा बढ़ा दी गई है। अब मैन्युफैक्चरिंग या सर्विस सेक्टर की किसी कंपनी में मैक्सिमम 20 करोड़ रुपए का निवेशस और 100 करोड़ रुपए के टर्नओवर वाली कंपनी भी मीडियम कैटेगरी में आएगी।


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