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DHFL के प्रमोटर वाधवन अडानी, ओकट्री और पिरामल के ऑफर के खिलाफ NCLT पहुंचे

DHFL के पूर्व प्रमोटर कपिल वाधवन चाहते हैं कि कंपनी के रेज्योलूशन प्लान में उन्हें भी हिस्सा बनाया जाए
अपडेटेड Nov 27, 2020 पर 15:03  |  स्रोत : Moneycontrol.com

मुश्किल में घिरी कंपनी DHFL (Deewan Housing Finance Company) के पूर्व प्रमोटर कपिल वाधवन (Kapil Wadhwan) ने रिजर्व बैंक की तरफ से नियुक्त एडमिनिस्ट्रेटर और कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) के खिलाफ NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल) का रूख किया है। RBI की निगरानी में DHFL का रेज्योलूशन हो रहा है और अब तक 4 कंपनियों ने DHFL खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है।



24 नवंबर को जमा किए अपने आवेदन में वाधवन ने ट्राइब्यूनल से निवेदन किया है कि जो चार कंपनियां DHFL के लिए बोली लगाना चाहती हैं, उनपर रोक लगा दी जाए। इन चार कंपनियों में ओकट्री कैपिटल (Oaktree Capital), पिरामल एंटरप्राइज, अडानी ग्रुप और SC Lowy शामिल है। वाधवन चाहते हैं कि इन चारों कंपनियों के ऑफर को खत्म कर दिया जाए।


इन चारों में अडानी ने DHFL के लिए सबसे बड़ी यानी 31,250 करोड़ रुपए की बोली लगाई है। अडानी DHFL का पूरा बिजनेस खरीदना चाहती है। पिरामल ने 26,000 करोड़ रुपए की बोली लगाई है और वह DHFL का सिर्फ रिटेल बुक लेना चाहती है। ओकट्री कैपिटल ने 31,000 रुपए की बोली लगाई है और पूरी कंपनी खरीदना चाहती है। अडानी ने सबसे पहले 2700 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी और कंपनी का होलसेल रीडेवलपमेंट अथॉरिटी बुक खरीदना चाहती थी। लेकिन फिर अचानक ओकट्री कैपिटल से 250 करोड़ रुपए ज्यादा यानी 31,250 करोड़ रुपए की बोली लगाकर पूरा बिजनेस खरीदने का मन बना लिया।


वाधवन अपने पुराने प्रस्ताव के साथ NCLT का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अक्टूबर में 43,000 करोड़ रुपए से ज्यादा चुकाने का प्रस्ताव किया था। वाधवन ने निवेदन किया है कि उन्हें भी CoC (कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स) का हिस्सा बनने दिया जाए क्योंकि एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर उनकी याचिका पर गौर नहीं किया गया है।


वाधवन ने अपने आवेदन में लिखा है कि 2018 में NBFC क्राइसिस शुरू होने के बाद DHFL के प्रमोटर के तौर पर काफी मेहनत की थी। उन्होंने ये भी कहा कि प्रमोटर्स ने क्रेडिटर्स का पैसा बिना किसी कटौती के लौटाने का प्रयास किया। DHFL पर 88,000 करोड़ रुपए का कर्ज है।


वाधवन ने NCLT को दिए आवेदन में यह भी कहा है कि DHFL के रिवाइवल में उनके प्लान पर भी गौर किया जाए। उन्होंने कहा कि ट्राइब्यूनल यह निर्देश दे सकता है कि DHFL का रेज्योलूशन प्लान और बोलियां NCLT की तरफ से नियुक्त किसी इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट को सौंपी जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट अपनी रिपोर्ट NCLT को देगा कि किसका रेज्योलूशन प्लान सबसे सही है। वाधवन ने कहा कि यह शेयरधारकों के हित में भी है।


वाधवन ने कहा कि ट्राइब्यूनल को बिना किसी पूर्वाग्रह के उन्हें क्रेडिट कमिटी का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक उनके इस आवेदन पर सुनवाई होती है तब तक RBI को एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने और DHFL के सभी रिकॉर्ड्स और डॉक्यूमेंट्स हैंडल करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।


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