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IRCTC IPO: क्या आपको इसमें निवेश करना चाहिए?

हर दिन करीब IRCTC प्लेटफॉर्म से 8 लाख टिकटों की बुकिंग होती है। जबकि टिकट बुकिंग सेगमेंट का कंपनी की आमदनी में सिर्फ 12 फीसदी हिस्सेदारी है
अपडेटेड Oct 01, 2019 पर 08:14  |  स्रोत : Moneycontrol.com

IRCTC IPO। रेल से सफर करने वाले लोगों के लिए यह नाम नया नहीं है। अब इसका IPO खुल गया है, ऐसे में यह समझना जरूरी है कि इसमें निवेश करना सही फैसला है या नहीं। कारोबार के नजरिए से देखें तो यह इंटरनेट टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म है। इस कारोबार में इसका एकाधिकार है। हर दिन करीब इसके प्लेटफॉर्म से 8 लाख टिकटों की बुकिंग होती है। जबकि टिकट बुकिंग सेगमेंट का कंपनी की आमदनी में सिर्फ 12 फीसदी हिस्सेदारी है। कंपनी के कर सहित मुनाफे में इस सेगमेंट की हिस्सेदारी 42 फीसदी है। यही वजह है कि सरकार IRCTC के शेयरों की बिक्री पर 12.6 फीसदी प्रीमियम की डिमांड कर रही है।


फिस्कल ईयर 2019 में कंपनी का P/E 19 था जो सरकारी कंपनियों के मुकाबले बेहतर है। हालांकि रेगुलेशन में बदलाव से कंपनी के रेवेन्यू मॉडल में कुछ बदलाव आ सकता है। ऐसा पहले भी हो चुका है जब IRCTC ने नोटबंदी के बाद कंविनिएंस फीस लेना बंद कर दिया था। इसकी वजह से फिस्कल ईयर 2018 में कंपनी की आमदनी कम हुई थी। पिछले दो साल में हालांकि IRCTC के रेवेन्यू की सालाना ग्रोथ 10.3 फीसदी बढ़कर 1868 करोड़ रुपए हो गई। खर्च बढ़ने की वजह से फिस्कल ईयर 2017 के कर बाद मुनाफा 14.3 फीसदी से घटकर फिस्कल ईयर 2019 में 13.9 फीसदी पर आ गया।


सितंबर 2019 में IRCTC ने दोबारा कंविनिएंस फीस लगाना शुरू किया, जिससे इसकी आमदनी बढ़ेगी। IRCTC अपनी वेबसाइट पर विज्ञापन, को-ब्रांडिंग और थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स से फीस के जरिए भी कमाई करती है।  


टिकट बुकिंग में दबदबा?


फिलहाल 72 फीसदी रेटल टिकट ऑनलाइन बुक हो रही हैं। आने वाले समय में यह और बढ़ेगा। IRCTC के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर महेंद्र प्रताप माल ने कहा, हम कई नई सीरिज और सेगमेंट पर काम कर रहे हैं। ये जल्द ही लॉन्च होंगी।


मिंट के मुताबिक, IRCTC के लो-मार्जिन वाला कारोबार केटरिंग है। कंपनी की आमदनी में इसकी हिस्सेदारी 55 फीसदी है जो धीरे-धीरे बढ़ रही है। दूसरी तरफ फू़ड ऑर्डरिंग सर्विस, बाहर से खाने की डिलीवरी की बात करें तो अभी हर दिन 20,000 ऑर्डर मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में इसकी ग्रोथ बढ़ सकती है।


पैकेज्ड वॉटर का कारोबार


फू़ड के अलावा पैकेज्ड वॉटर के कारोबार में भी IRCTC का दबदबा है जिसकी ग्रोथ लगातार बढ़ रही है। रेल नीर ब्रांडनेम से IRCTC पैकेज्ड वॉटर बेचती है। रेलवे मिनिस्ट्री ने सिर्फ इसी कंपनी को पैकेज्ड वॉटर बेचने का अधिकार दिया है। यह डिविजन रेलवे की 45 फीसदी डिमांड को पूरा करता है। अगले दो साल में IRCTC 6 नए प्लांट लगाने वाला है। इससे कंपनी रेलवे की पैकेज्ड वाटर की 80 फीसदी डिमांड पूरी कर सकती है।


एनालिस्ट्स का कहना है कि कंपनी पर कर्ज बहुत कम और ज्यादा कैश जेनरेशन की सुविधा है। इंडियानिवेश सिक्योरिटीज के हेड-रिसर्च रिटेल- धर्मेश कांत का कहना है कि IRCTC का RoE (रिटर्न ऑन इक्विटी) बेहतर है और इसका ऑपरेटिंग मार्जिन 20 फीसदी है। कुल मिलाकर आने वाले साल में निवेशकों को 20% से ज्यादा प्रॉफिट हो सकता है। अगर आप इसमें निवेश करना चाहते हैं तो लिस्टिंग के बाद रेगुलेटर से जुड़े जोखिम पर नजर जरूर रखें।


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