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नीरव मोदी के PNB घोटाले से क्यों बड़ा है PMC बैंक स्कैम?

PMC बैंक के पिछले साल की रिपोर्ट देखें तो उसकी बैलेंस शीट में कुल 8306 करोड़ रुपए का लोन है। हैरानी की बात है कि इसका 75 फीसदी हिस्सा अकेले एक कंपनी को दिया गया
अपडेटेड Sep 30, 2019 पर 16:58  |  स्रोत : Moneycontrol.com

लता वेंकटेश की रिपोर्ट-


Punjab & Maharashtra Co-operative (PMC) बैंक में जिसे घोटाले का खुलासा हुआ है वह पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के मुकाबले बहुत छोटा नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, PMC बैंक ने रियल एस्टेट कंपनी HDIL को बैंक के कुल लोन का करीब 75 फीसदी या करीब 6000 करोड़ रुपए का कर्ज दिया था। हालांकि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि 6000 करोड़ रुपए की पूरी रकम मूलधन है या इसमें ब्याज भी जुड़ा है। PMC बैंक के पिछले साल की रिपोर्ट देखें तो उसकी बैलेंस शीट में कुल 8306 करोड़ रुपए का लोन है। हैरानी की बात है कि इसका 75 फीसदी हिस्सा अकेले एक कंपनी को दिया गया था।


PNB घोटाला क्या था? 


PNB बैंक का लोन बुक करीब 6 लाख करोड़ रुपए का था। सरकार की गारंटी होने की वजह से इसमें से 13,000 करोड़ रुपए लोन की भरपाई हो सकती थी। लेकिन PMC कोऑपरेटिव बैंक है, जहां कोई सरकारी सपोर्ट नहीं है। ऐसे में 6000 करोड़ रुपए में से अगर आधा भी बैड लोन हो जाता है तो PMC बैंक का 30 फीसदी पैसा डूब जाएगा।


मैनेजमेंट की मिलीभगत?


नीरव मोदी के PNB घोटाला और PMC बैंक के घोटाला में मामूली फर्क है। PNB घोटाले में SWIFT (सोसायटी ऑफ वर्ल्डवाइड इंटरबैंक टेलीकम्युनिकेशन) मेसेजिंग सिस्टम के सिर्फ कुछ अधिकारी ही करप्ट थे। बैंक के सीनियर मैनेजर इस मामले की अनदेखी करने की लिए दोषी थे। लेकिन PMC का मामला देखकर ऐसा लगता है मानों बैंक का पूरा बोर्ड और टॉप मैनेजमेंट HDIL के साथ मिलीभगत में शामिल था।


इस बात पर भरोसा करना मुश्किल है कि बैंक के बोर्ड और टॉप मैनेजमेंट को इस बात की भनक ना हो कि वो जिन कंपनियों को लोन दे रहे हैं वो सब HDIL से जुड़ी हुई हैं।


अगर आप सामान्य सर्च के लिए Google भी करेंगे तो साफ पता चलता है कि बैंक के मौजूदा चेयरमैन वारयाम सिंह 2015 तक HDIL के डायरेक्टर थे। इससे पहले वह दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन (DHFL) के डायरेक्टर थे। HDIL और DHFL के प्रमोटर दोनों भाई हैं। HDIL सरण बधावन की कंपनी है और DHFL के प्रमोटर कपिल वधावन हैं। यह साफ है कि यह एक सांठगांठ के जरिए किया गया घोटाला है।


सिस्टम की नाकामी?


इस पूरे घोटाले की भनक RBI को क्यों नहीं लगी। RBI का कोऑपरेटिव बैंक सुपरवाइजरी टीम कम सक्रिय रहता है क्योंकि सामान्य तौर पर कोऑपरेटिव बैंक छोटे लोन बांटते हैं। यह भी मुमकिन है कि HDIL ने कई छोटी कंपनियां बनाकर PMC बैंक से लोन उठाया हो। जिसकी वजह से वह RBI की नजरों में नहीं आ पाई होगी।


आम तौर पर छोटे कोऑपरेटिव बैंकों की जांच हर 18 महीने में होती है। लेकिन PMC जैसे बड़े कोऑपरेटिव बैंक की जांच हर साल होती है। वजह चाहे जो भी हो लेकिन RBI के लिए यह स्पष्टीकरण देना मुश्किल है कि उसकी नाक के नीचे इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई।


अब जरूरत है कि फ्रॉड करने वाले सभी लोगों को गिरफ्तार करके उनसे जितना ज्यादा हो सके, रकम वसूली जाए। HDIL बैंकरप्सी की प्रक्रिया के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल में है, लिहाजा उससे बहुत ज्यादा वसूली होने की उम्मीद नहीं है।  


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