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जेट एयरवेज ने नीदरलैंड का बिजनेस KLM एयरलाइन को बेचा

डील में सिर्फ जेट एयरवेज (Jet Airways) का कारोबार बिका है, इसके शेयरहोल्डिंग पैटर्न पर इसका कोई असर नहीं होगा
अपडेटेड Jan 17, 2020 पर 16:01  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Jet Airways। जेट एयरवेज ने 16 जनवरी को बताया कि वह नीदरलैंड की पूरी एसेट्स डच एयरलाइन KLM को बेच रही है। हालांकि इस डील में नीदरलैंड के क्या एसेट्स शामिल हैं, इसकी जानकारी नहीं मिली है।


जेट की तरफ जारी बयान में कहा गया है, "अगर यह डील फाइनल होता है तो इसमें कंपनी के बिजनेस का एक हिस्सा बिकेगा। कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न पर इसका कोई असर नहीं होगा।"


जेट एयरवेज कभी देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी थी। लेकिन फंड की कमी के कारण अप्रैल 2019 से इसका कामकाज बंद हो गया। एयरलाइन का कामकाज ठप पड़ने से हजारों लोगों की नौकरी चली गई।  


जून में जेट एयरवेज के लेंडर्स इसे बैंकरप्सी कोर्ट में लेकर गए। SBI की अगुवाई में लेंडर्स जेट एयरवेज के रिवाइवल प्लान के लिए रेडी हो गए थे। KLM, एयर फ्रांस KLM का हिस्सा है। KLM जेट एयरवेज का कोडशेयर पार्टनर था।


क्यों डूबी थी जेट एयरवेज?


क्या आप जानते हैं कि आखिर इस संकट की शुरुआत कब हुई। अगर हम पहले होने वाली घटनाओं को दोहराएं तो पता चलेगा कि इन सब की शुरुआत पिछली 2018 की दिवाली से हुई थी।


तब नरेश गोयल अपने फाइनेंशियल एडवाइजर्स के साथ दीपक पारेख से सलाह लेने मुंबई के उनके घर पर गए थे। वह जानना चाहते थे कि जेट एयरवेज को कैसे बचाया जाए। तब टाटा ग्रुप संकट में घिरी जेट को खरीदना चाहता था। उस वक्त TPG कैपिटल की अगुवाई में एक प्राइवेट इक्विटी कंसोर्शियम भी दौड़ में था।


तब दीपक पारेख ने नेरश गोयल को यह सलाह दी थी कि वह पीछे हट जाएं और नए निवेशकों को मौका दें। पारेख अबू धाबी सरकार के मुख्य सलाहकार थे। दिलचस्प है कि यहीं की सरकारी एयरलाइन कंपनी एतिहाद जेट की पार्टनर थी।


सुनी सबकी की अपने मन की


नरेश गोयल की दोस्ती कई नेताओं, पॉलिसीमेकर्स, चीफ एग्जिक्यूटिव, एयरलाइन लीज पर देने वालों और मैन्युफैक्चर्स से हैं। उन्होंने सबकी बात सुनी लेकिन की अपने मन की। उन्होंने पद छोड़ने से मना कर दिया। गोयल को यह भरोसा था कि वह अपनी कंपनी बचा लेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अभी तक इस डील में रूचि ले रहे टाटा ग्रुप ने भी अपना हाथ पीछे खींच लिया।


ईटी के मुताबिक, एविएशन इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि गोयल ने एयरलाइन चलाने के लिए जिन लोगों को हायर किया था उनपर और भरोसा करना चाहिए था। उन्होंने कई गलतियां की हैं। उनके लिए कंपनी से निकलना मुश्किल फैसला था जिसकी वजह से हालात और खराब हुए हैं। यहां तक कि उनके पास टाटा ग्रुप जैसा इनवेस्टर निवेश के लिए तैयार था लेकिन गोयल किसी और को मौका देने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने जनवरी 2019 तक अपना पद जैसे-तैसे संभाल रखा था। लेकिन जेट एयरवेज का बुरा दौर शुरू हो चुका था।


जेट की नाकामी, फाउंडर की नाकामी


हाल के दिनों तक जेट एयरवेज को हर दिन 21 करोड़ का लॉस हो रहा था। इसके अलावा कंपनी पर कम से कम 1500 करोड़ रुपए का कर्ज था।


जेट की कामयाबी सीधे तौर पर प्रमोटर की नाकामी मानी जाएगी। कुछ कारोबार की नाकामी को प्रमोटर की नाकामी से अलग करके नहीं देखा जा सकता है। इंडस्ट्री के कई लोगों कहते थे कि गोयल का मानना है कि मैं ही जेट में हूं। जब लोग जेट की तरफ देखते हैं तो वो मेरी तरफ देखते हैं। गोयल अपनी वाकपटुता के लिए भी जाने जाते थे। लेकिन खुद की बात करते-करते उनकी सबसी बड़ी एसेट आज सबसे बड़ी लायबिलिटी बन गई है।


कंपनी के बोर्ड में एतिहाद के रहते हुए भी गोयल ने डेल्टा एयरलाइंस से खेलना नहीं छोड़ा। डेल्टा ने कंपनी में स्टेक लेने के लिए 300 रुपए प्रति शेयर का ऑफर दिया। उस वक्त नरेश गोयल 400 रुपए प्रति शेयर पर अड़े रहे। यह वो दौर था जब कंपनी के शेयर पिछले 6 महीनों में 182 रुपए से लेकर 347 रुपए के बीच ट्रेड कर रहे थे।


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