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Franklin Templeton ने कहा ई-वोटिंग पर गुजरात हाईकोर्ट के स्थगन आदेश की कर रहे हैं समीक्षा

Franklin Templeton ने अप्रैल में अपने 6 डेट फंड बंद कर दिए थे।
अपडेटेड Jun 08, 2020 पर 08:42  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Franklin Templeton ने अप्रैल में रिडेम्पशन के दबाव और बॉन्ड बाजार में लिक्वीडिटी की कमी का हवाला देते हुए अपने 6 डेट फंड बंद कर दिए थे। इन फंडों में फ्रैंकलिन इंडिया लो ड्यूरेशन फंड, फ्रैंकलिन इंडिया डायनेमिक एक्यूरल फंड, फ्रैंकलिन इंडिया क्रेडिट रिस्क फंड, फ्रैंकलिन इंडिया शॉर्ट टर्म इनकम प्लान, फ्रैंकलिन इंडिया अल्ट्रा शॉर्ट बॉन्ड फंड और फ्रैंकलिन इंडिया इनकम अपॉर्चुनिटी फंड शामिल थे।अब उसने शुक्रवार को कहा है कि वह गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश की जांच कर रहा है जिसके तहत फंड हाउस की 6 डेट स्कीम को समेटने (winding up) के लिए होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रक्रिया पर स्थगन लगा दिया गया।


बता दें कि ई-वोटिंग विंडो को 9 जून को खुलना और 11 जून को बंद होना था। इसके बाद 12 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए यूनिट होल्डर्स की बैठक होनी थी। फंड हाउस ने इन स्कीमों के निवेशकों को दो विकल्प दिए है जिनमें ट्रस्टियों द्वारा एसेट का monetisation(बिक्री) या फिर प्रक्रिया का संचालन करने के लिए तीसरे पक्ष को काम पर रखना। इन प्रस्तावों के अलावा निवेशकों के पास दोनों प्रस्तावों में से किसी एक के लिए भी वोट न देने का विकल्प होगा, लेकिन इससे स्कीम एसेट के बिक्री में देरी होगी।


निवेशकों की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी जिसमें फंड हाउस की ओर से लोन योजनाओं को बंद करने का आरोप लगाया गया था। Franklin Templeton MF के प्रवक्ता ने कहा है कि मौजूदा समय में हम मामले की जांच कर रहे हैं और आवश्यकतानुसार उचित कदम उठाएंगे।


इससे पहले, मद्रास उच्च न्यायालय ने Franklin Templeton MF और SEBI को एक निवेशक समूह, चेन्नई फाइनेंशियल मार्केट्स अकाउंटेबिलिटी (CFMA)द्वारा याचिका दायर करने के बाद नोटिस जारी किया था, जिसमें फंड हाउस द्वारा लगभग 28,000 करोड़ रुपये के निवेशकों की सुरक्षा के लिए छह योजनाओं में फंसे धन को बंद कर दिया गया था।


न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तथा आम जनता के पैसे के बर्बाद होने के खतरे के मद्देनजर सेबी को इस मामले में अब तक हुई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट के साथ अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।


निवेशक समूह ने ये भी कहा है कि वो सभी प्रभावित निवेशको को एक साथ लाने के लिए अलग से एक ऑनलाइन पिटीशन शुरू करने जा रहा है। इसको प्रधान मंत्री के कार्यालय सहित Franklin Templeton के अमेरिकी पैरेंट और US मार्केट रेग्यूलेटर SEC को भी भेजा जाएगा।




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