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अच्छी खबर: सस्ती होगी मसूर की दाल, सरकार ने फिर की आयात शुल्क में कटौती

मसूर दाल के आयात शुल्क में 20 फीसदी की कटौती की है
अपडेटेड Sep 19, 2020 पर 13:52  |  स्रोत : Moneycontrol.com

दलहन (Pulses) की कीमतों को काबू में करने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Central Government) ने बड़ा फैसला किया है। सरकार ने घरेलू बाजार में दलहन की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से मसूर दाल (Masoor Dal) के आयात शुल्क (Import Duty) में 20 फीसदी की कटौती की है। यह कटौती अक्टूबर-अंत तक लागू रहेगी। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड यानी CBIC (Central Board of Indirect Taxes and Customs) की एक अधिसूचना (Notification) में जून 2017 की अधिसूचना में संशोधन किया गया है। इसके मुताबिक, 18 सितंबर, 2020 से 31 अक्टूबर, 2020 तक की अवधि के लिए मसूर दाल (Lentil) पर मूल सीमा शुल्क को कम किया गया है।


10 फीसदी हुआ आयात शुल्क


न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, अमेरिका (United States) के अलावा अन्य देशों से मसूर दाल पर आयात शुल्क 30 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। अमेरिका से मसूर के आयात मामले में शुल्क को पहले के 50 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार ने इससे पहले जून में भी अमेरिका के अलावा अन्य किसी भी देश से आने वाली आयात की खेप के लिए आयात शुल्क को घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया था। US के मामले में, सीमा शुल्क 50 फीसदी से 30 फीसदी तक लाया गया था।


सबसे बड़ा आयातक देश है भारत


सीमा शुल्क की घटी दर 2 जून से 31 अगस्त, 2020 तक की अवधि के लिए लागू रही, जिसके बाद एक सितंबर से सीमा शुल्क वापस पुराने स्तर पर बहाल हो गया। बता दें कि भारत दालों का दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता और आयातक देश है। सरकार के अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2019-20 (जुलाई-जून) के दौरान देश का कुल दलहन उत्पादन 2.31 करोड़ टन रहा था, जो पिछले वर्ष 2.21 करोड़ टन के करीब रहा था।


उत्पादन में गिरावट का अनुमान


इसमें से मसूर दाल का उत्पादन घटकर 11.8 लाख टन रह जाने का अनुमान है, जो उत्पादन वर्ष 2018-19 में 12.3 लाख टन का हुआ था। भारतीय दलहन और अनाज संघ के उपाध्यक्ष Bimal Kothari ने सरकार के इस कदम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पीटीआई से कहा कि सरकार की एक स्थिरता वाली आयात नीति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जून में की गई शुल्क कटौती से विदेशी किसानों और व्यापारियों को फायदा हुआ, क्योंकि भारत द्वारा आयात शुल्क घटाने के बाद दाल की वैश्विक कीमतें बढ़ गईं।


बिमल कोठारी ने कहा कि घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश ने पिछले वित्त वर्ष में करीब 25 लाख टन दालों का आयात किया और उसमें से 8.5 लाख टन मसूर दाल थी। उन्होंने चालू वित्तवर्ष में मसूर दाल के आयात के बढ़कर 10 लाख टन होने का अनुमान लगाया है, हालांकि समग्र आवक (Overall inwards) घटकर 20 लाख टन रह सकती है।


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