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ऑटो सेक्टर को बचाने के लिए सरकार जल्द लाये स्क्रैपेज पॉलिसीः Timken India

कौल का कहना है कि अगर सरकार कुछ कदम उठाये तो इस सेक्टर को राहत मिल सकती है।
अपडेटेड Dec 12, 2019 पर 15:38  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

नो योर कंपनी में आज रडार पर Timken India है। Timken India टैपर्ड रोलर बियरिंग्स और कंपोनेंट्स बनाने वाली भारत की अग्रणी कंपनियों में से एक है जिसकी मैनुफैक्चरिंग इकाई जमशेदपुर और रायपुर में है। कंपनी के प्रोडक्ट मध्यम और हैवी ट्रकों, ऑफ हाइवे उपकरणों और रेलवे में उपयोग में लाये जाते हैं। कंपनी के 118 प्लांट और सर्विस सेंटर हैं।


सालाना आधार पर सितंबर तिमाही में कंपनी की आय 3 प्रतिशत घटकर 401.2 करोड़ रुपये रही जबकि पिछले साल की सितंबर तिमाही में कंपनी की आय 413.8 करोड़ रुपये रही थी।


सालाना आधार पर सितंबर तिमाही में कंपनी का मुनाफा 44 प्रतिशत बढ़कर 49.8 करोड़ रुपये रहा जबकि पिछले साल की सितंबर तिमाही में कंपनी का मुनाफा 34.6 करोड़ रुपये रहा था।


सालाना आधार पर सितंबर तिमाही में कंपनी का एबिटडा बढ़कर 90 करोड़ रुपये रहा जबकि पिछले साल की सितंबर तिमाही में कंपनी का एबिटडा 70 करोड़ रुपये रहा था।


कंपनी के कारोबार और नतीजों पर सीएनबीसी-आवाज़ से बातचीत करते हुए कंपनी के CMD संजय कौल ने कहा कि ऑटो सेक्टर की मंदी से कंपनी के परफॉर्मेंस पर प्रभाव पड़ रहा है जबकि अन्य सेगमेंट से सहारा भी मिल रहा है।


कौल ने आगे कहा कि विंड के सेगमेंट में अच्छा उछाल है इसमें गियर बॉक्सेस की मैनुफैक्चरिंग बड़ी मात्रा में हो रही है और इसमें निर्यात भी हो रहा है। रेल से भी अच्छे ऑर्डर मिल रहे हैं लेकिन सच्चाई यहीं है कि ऑटो सेक्टर की मंदी ने हवा निकाल दी है।


कौल का कहना है कि अगर सरकार कुछ कदम उठाये तो इस सेक्टर को राहत मिल सकती है। इसके लिए 15 साल वाले वाहनों के लिए स्क्रैपेज पॉलिसी लानी चाहिए। ऑटोमोटिव की रिवाइवल बहुत जरूरी हो गया है। हालांकि कंपनी का ग्रोथ का गाइडेंस बरकरार है।


टार्गेट इन्वेस्टिंग के समीर कालरा ने Timken India पर अपनी राय देते हुए कहा कि कमर्शियल वाहन में मंदी इनके लिए चिंता का विषय है। इसलिए इस शेयर से दूर रहना चाहिए और जिन्होंने ने पहले से लिया है उन्हें मुनाफावसूली करनी चाहिए।


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