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CSR के नियमों का पालन नहीं करने पर अपराध माना जाएगा

कॉरपोरेट मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास की अध्यक्षता वाले पैनल ने जोर देकर कहा कि CSR व्यय को सरकारी योजनाओं के लिए वित्त पोषण में अंतर का जरिया नहीं माना जाना चाहिए
अपडेटेड Aug 14, 2019 पर 13:23  |  स्रोत : Moneycontrol.com

उच्च स्तरीय सरकार की समिति ने मंगलवार को कंपनी कानून के तहत Corporate Social Responsibility (कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व) यानी CSR पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। जिसमें CSR का पालन नहीं करने उसे अपराध की श्रेणी में लाने की सिफारिश की गई है।


कंपनी एक्ट 2013 के तहत लाभ कमाने वाली कंपनियों को अपने तीन साल के औसत नेट प्रॉफिट का कम से कम दो फीसदी संबंधित फाइनेंशियल ईयर में CSR पर खर्च करने होते हैं। 


कॉरपोरेट मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास की अध्यक्षता वाले पैनल ने जोर देकर कहा कि CSR व्यय को सरकारी योजनाओं के लिए वित्त पोषण में अंतर का जरिया नहीं माना जाना चाहिए।


श्रीनिवास ने मंगलवार को रिपोर्ट वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपी। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार पैनल ने CSR का अनुपालन नहीं करने पर इसे दिवानी अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है और जुर्माना में बदला जा सकता है। इसके अलावा पैनल ने CSR में किए गए व्यय पर कर छूट देने की सिफारिश की।


विज्ञप्ति में कहा गया है कि समिति की अन्य सिफारिशों में CSR के तहत 5 करोड़ रुपये या उससे अधिक के खर्च के लिए प्रभाव आकलन अध्ययन शुरू करने और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के पोर्टल पर क्रियान्वयन एजेंसियों का रजिस्ट्रेशन शामिल हैं।


रिपोर्ट के मुताबिक, जो कंपनियां सीएसआर के तहत 50 लाख रुपये से कम राशि निर्धारित करती हैं, उन्हें सीएसआर समिति गठित करने की जरूरत से छूट दी जा सकती है।


समिति ने इस बात पर जोर दिया कि CSR के तहत फंड सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए नई तकनीकी आधारित समाधान प्रणाली उपलब्ध कराने पर खर्च होनी चाहिए।


मौजूदा CSR रूपरेखा की समीक्षा और इस व्यवस्था को मजबूत बनाने के बारे में सुझाव देने के लिये श्रीनिवास की अध्यक्षता में समिति का गठन अक्टूबर 2018 में किया गया था।


आपको बता दें कि, समिति के सदस्यों टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन, बैन कैपिटल प्राइवेट इक्विटी के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित चंद्रा, पूर्व अतिरिक्त सोलिसीटर जनरल बी एस नरसिम्हा, लूथरा एंड लूथरा लॉ ऑफिस के संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव लूथरा और अपोलो की  एग्जूक्यूटिव वाइस चेयरपर्सन शोभना कामनेनी शामिल हैं। 


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