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सरकार भले 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी करे लेकिन पुरानी कंपनियां शामिल नहीं होंगी: COAI

COAI के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज ने कहा, कंपनियों की माली हालत ऐसी नहीं है कि वो स्पेक्ट्रम की नीलामी में हिस्सा ले पाएंगी
अपडेटेड Nov 13, 2019 पर 09:43  |  स्रोत : Moneycontrol.com

इस साल स्पेक्ट्रम की नीलामी हो या नहीं, इस बात पर फैसला लेने का अधिकार सरकार के पास है। टेलीकॉम कंपनियों के संगठन COAI (सेल्यूलर्स ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) का कहना है कि सरकार चाहे तो इस साल स्पेक्ट्रम की नीलामी करा सकती है लेकिन स्टैच्यूटरी बकाए को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, उसके बाद पुरानी कंपनियां शायद ही नीलामी में हिस्सा लें।
 
COAI के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज ने कहा, ‘‘सरकार यदि चाहे तो वह नीलामी कर सकती है, लेकिन मौजूदा वित्तीय हालात को देखते हुए बड़ा सवाल है कि नीलामी में भाग कौन लेगा?’’


उन्होंने कहा कि स्टैच्यूटरी बकाए पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पुरानी टेलीकॉम कंपनियां पहले ही मुश्किल में हैं। ऐसे में उनके स्पेक्ट्रम की नीलामी में शामिल होने की उम्मीद कम है।


मैथ्यूज ने कहा, ‘‘इसके बाद भी नीलामी सरकार के अधिकार क्षेत्र के दायरे में है। यदि नीलामी की ही जाती है, तब सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि स्पेक्ट्रम की नीलामी में किसी का वर्चस्व नहीं हो।’’


उन्होंने इसे समझाते हुए कहा कि 3.3 से 3.6 गीगाहर्ट्ज बैंड में 5G के लिये महज 175 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम उपलब्ध हैं। ऐसे में किसी एक कंपनी को 100 मेगाहर्ट्ज से अधिक स्पेक्ट्रम की मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए।


मैथ्यूज ने कहा, ‘‘यदि किसी कारण प्रतिस्पर्धी परिस्थितियां बदलती हैं तो भविष्य में अन्य कंपनियों के लिये भी 5जी स्पेक्ट्रम उपलब्ध रहना चाहिए।’’


अभी इस बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं बताया गया है कि स्पेक्ट्रम की नीलामी कब होने वाली है।


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