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GST फाइल करते समय इन बातों का रखें ध्यान

प्रकाशित Tue, 16, 2019 पर 18:01  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अगर आप कारोबारी हैं और दो करोड़ रुपए से अधिक का सालाना कारोबार करते हैं, तो वित्त मंत्रालय ने आपके लिए काफी सहूलियत दे दी है। अब आप अपनी ऑडिट रिपोर्ट भी भर सकते हैं। हैं वैसे टैक्सपेयर्स को सालाना रिटर्न के साथ इसे जमा करना होता है जिनका कारोबार वित्त वर्ष में 2 करोड़ रुपये से अधिक रहा है। GST नेटवर्क ने अपने पोर्टल पर इसका प्रारूप उपलब्ध करा दिया है। इस रिपोर्ट को 30 जून तक फाइल कर सकते हैं। वित्त मंत्रालय ने पिछले साल 31 दिसंबर को GSTR-9C के सालाना रिटर्न फॉर्म जारी किए थे।


कई बार ऐसा होता है कि हम जल्दबाजी कई गलतियां कर जाते हैं। इस लिए जीएसटी फाइल हो या इनकम टैक्स है, कुछ भी फाइल करना हो तो सावधानी पूर्वक करना चाहिए। जिससे गलतियां बिल्कुल भी न हों।


डेलॉइट इंडिया की सीनियर डायरेक्टर सलोनी रॉय के मुताबिक, हमें यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि फाइलिंग सही हो। जो डेटा आपने दिया है उसके पूरे सबूत होने चाहिए, क्योंकि जीएसटी ऑडिट के समय इसकी जरूरत पड़ेगी। ये सभी डॉक्यूमंट जीएसटी ऑडिट के लिए आधार बनेंगे। डॉक्यूमेंट सबसे महत्वपूर्ण हैं और यही डेटा आपके सालाना रिटर्न में काम देंगे।


रॉय के अनुसार, यदि आपके पिछले रिटर्न में पूरा डेटा नहीं था तो आप सालाना रिटर्न में आप कुछ जोड़ भी सकते हैं। हालांकि अतिरिक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं किया जा सकता है और जीएसटीआर3बी में जो दिया गया है वही रहेगा।


और अंत में आपको इनपुट टैक्स क्रेडिट के बारे में कुछ अतिरिक्त काम हो सकता है। जिसमें आपको कई बकेट होंगे, जहां आपको इनपुट, इनपुट सर्विस और कैपिटल गुड्स (पूंजीगत वस्तुओं) की जानकारी देनी होगी। इसे भरने के लिए काफी समय की जरूरत होती है। साथ ही इसे बेहद सावधानी के साथ भरना चाहिए। 


जीएसटी ऑडिट


जीएसटी ऑडिट भी रिटर्न के साथ जमा करना जरूरी होता है। रिटर्न इसका प्राइमरी डॉक्यूमेंट है और ऑडिट रिटर्न के माध्यम से होता है। ऑडिट टैक्सपेयर्स का फाइनेंसिएल डिटेल है। सभी जीएसटी रजिस्ट्रेशन का ऑडिट जरूरी होता है। रिटर्न ऑडिट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन दोनों डॉक्यूमेंट्स के लिए फाइल करने की तारीख के बाद पर्याप्त समय की जरूरत है।