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ZEE को दिया था उचित ऑफर, जबरन अधिग्रहण में कभी नहीं रहा हमारा विश्वास: रिलायंस इंडस्ट्रीज

रिलायंस ने कहा कि ZEE और इनवेस्को के बीच जारी विवाद में उसका नाम आने को लेकर उसे दुख है
अपडेटेड Oct 14, 2021 पर 09:05  |  स्रोत : Moneycontrol.com

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बुधवार को कहा कि ZEE एंटरटेनमेंट (Zee Entertainment)  और इनवेस्को (Invesco) के बीच चल रहे विवाद में उसका नाम आने को लेकर उसे दुख है। साथ ही कंपनी ने कहा उसकी तरफ से ZEE को दिए गए ऑफर को मीडिया में गलत तरीके से पेश किया गया है।


रिलायंस ने एक बयान जारी कर कहा, "हमने एक उचित वैल्यूशएन पर अपनी सभी मीडिया संपत्तियों का ZEE के साथ मर्ज करने का एक व्यापक प्रस्ताव रखा था। इसके तहत ZEE और हमारी संपत्तियों की समान मापदंड पर वैल्यूएशन तय की गई थी।"


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रिलायंस ने यह भी कहा कि इनवेस्को ने इस मामले में उसके प्रतिनिधियों और ZEE के मैनेजिंग डायरेक्टर पुनीत गोयनका के बीच डायरेक्ट मीटिंग कराने में रिलायंस की मदद की थी।


बयान में कहा गया है, "इस प्रस्ताव में विलय में शामिल सभी कंपनियों की क्षमताओं के उचित इस्तेमाल पर जो था, जिससे ZEE के शेयरहोल्डरों सहति सभी को काफी फायदा पहुंच सकता था। "


रिलायंस की हमेशा कोशिश रहती है कि निवेश वाली कंपनियों के मौजूदा मैनेजमेंट को बनाया रखा जाए और उन्हें उनके अच्छे प्रदर्शन के लिए रिवॉर्ड भी देती है। इसी तरह इस प्रस्ताव में भी पुनीत गोयनका के मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर बने रहने और उन्हें ESOPs जारी करना भी शामिल था।"


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बयान में आगे कहा, "हालांकि फाउंडिंग फैमिली ने प्रेफरेंशियल शेयर को सब्सक्राइब कर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का फैसला किया, जिसे लेकर इनवेस्को और गोयनका के बीच मतभेद हो गए। निवेशकों का मानना था कि फाउंडर्स कभी भी मार्केट से खरीदारी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं। हम रिलायंस में, सभी फाउंडर्स का सम्मान करते हैं और हमने कभी भी किसी भी ट्रांजैक्शन के लिए जबरदस्ती या अनैतिक तरीका नहीं अपनाया है। ऐसे में हम इस मामले में आगे नहीं बढ़े।"


इससे पहले इनवेस्को ने ZEE एक लेटर लिखकर कहा था कि उसे आशंका है कि सोनी के साथ उसकी प्रस्तावित मर्जर से प्रमोटर फैमिली को तो फायदा होगा, लेकिन यह ZEE के माइनॉरिटी शेयरहोल्डरों के हितों को नुकसान पहुंचाएगा।


मंगलवार को पुनीत गोयनका ने ZEE के बोर्ड को बताया था कि इनवेस्को फरवरी में उनके पास एक बड़े भारतीय समूह के साथ मर्जर का प्रस्ताव लेकर आई थी। हालांकि गोयनका ने तब रिलायंस इंडस्ट्री का नाम नहीं लिया था।


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गोयनका ने कहा कि उन्होंने इस डील को ठुकरा दिया क्योंकि इससे ZEE के शेयरहोल्डरों को नुकसान होता। इसके बाद बुधवार सुबह इनवेस्को ने गोयनका के दावे को खारिज करते हुए कहा कि गोयनका सिर्फ उसकी तरफ से बुलाई गई एक्सट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) की मांग को टालने के लिए यह सब कर रहे हैं।


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