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चाइनीज कंपनी Evergrande के दिवालिया होने से जानिए क्यों सहमी है पूरी दुनिया?

भारतीय शेयर बाजारों में भी 1% की गिरावट दिखी। निफ्टी-50 ने जुलाई के बाद अपना अब तक का सबसे खराब कारोबारी दिन दर्ज किया
अपडेटेड Sep 21, 2021 पर 15:53  |  स्रोत : Moneycontrol.com

चीन की दिग्गज रियल एस्टेट कंपनी Evergrande (एवरग्रैंड) के दिवालिया होने की आशंका से सोमवार को करीब पूरी दुनिया के शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली। भारतीय शेयर बाजारों में भी 1 पर्सेंट की गिरावट दिखी और निफ्टी 50 ने जुलाई के बाद से अपना अब तक का सबसे खराब कारोबारी दिन दर्ज किया।


स्टॉक्स यूरोप 600 भी 2 पर्सेंट लुढ़क गया, जो जुलाई के बाद से उसकी सबसे बड़ी गिरावट है। वॉल स्ट्रीट में भी कारोबार के लिए मुश्किल दिन रहा और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स 500 अंक से अधिक घट गया। एवरग्रैंड के दिवालिया होने की आशंका से हांगकांग के स्टॉक मार्केट Hang Seng में प्रॉपर्टी स्टॉक्स की जमकर बिकवाली हुई। हालांकि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के मार्केट्स छुट्टियों के कारण बंद थे।


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क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

Evergrande पर करीब 300 अरब डॉलर का भारी भरकम कर्ज है। एवरग्रैंड ने पहले इस बात को छिपाई और अपनी बैलेंस शीट मजबूत बताती रही। हालांकि हालात हाथ से निकलने के बाद उसने कबूला कि उसके ऊपर 300 अरब डॉलर का पहाड़ जैसा कर्ज है। और कंपनी इसे चुका पाने में असमर्थ है। भारतीय रुपयों में यह रकम करीब 22 लाख करोड़ रुपये के आसपास आएगी। यह कई देशों की कुल जीडीपी से भी ज्यादा बड़ी रकम है।


मार्केट के एक जानकार ने बताया कि एवरग्रैंड जैसी बड़ी कंपनी अगर डिफॉल्ट करती है, तो इसका असर चीन के पूरे रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ सकता है। साथ ही यह अपने साथ बाकी सभी सेक्टरों की ग्रोथ को भी मंद कर सकती है। वैश्विक लेवल पर इसे लेकर चिंता इसलिए जताई जा रही है कि चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। अगर वहां कुछ होता है, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ेगा, जैसा कि कोरोना के समय देखा जा चुका है।


एक दूसरे मार्केट एनालिस्ट ने बताया, "सोमवार को बाजारों में गिरावट की मुख्य वजह एवरग्रैंड का डिफॉल्ट करना रहा। यह भी संभव है कि आने वाले दिनों में और गिरावट देखने को मिले। निवेशकों के लिए इस समय फैसला करना कठिन हो सकता है। इसके अलावा फेडरल रिजर्व की मॉनिटरी पॉलिसी और डेल्टा वेरियंट के बढ़ते केस से भी बाजार चिंतित है।"


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क्या है एवरग्रैंड?

एवरग्रैंड चीन की सबसे बड़ी रीयल एस्टे कंपनियों में से एक है। इसकी स्थापना 1996 में ग्वांझगू शहर में हुई थी। कभी यह विशाल कंपनी चीन के रियल एस्टेड इंडस्ट्री का चेहरा हुआ करती थी। इसने चीन के करीब 280 शहरों में करोड़ों लोगों के घर का सपना पूरा किया है। लेकिन अब इस पर 300 अरब डॉलर का कर्जा आ गया है, जिसने इसकी शेयरों की कीमत, क्रेडिट रेटिंग और प्रतिष्ठा को जमीन पर ला दिया है।


एवरग्रैंड के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

एवरग्रैंड के साथ इससे जुड़े कई चीनी लोग भी डूबने की कगार पर आ गए हैं। इसके चलते पिछला पूरा Shenzhen शहर में स्थित एवरग्रैंड के ऑफिस के बाहर भारी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, जो चीन में आमतौर पर नहीं देखा जाता है। प्रदर्शनों में एवरग्रैंड के कर्मचारी, सेल्स एजेंट, निवेशक और भुगतान नहीं पाने वाले कॉन्ट्रैक्टर आदि शामिल थे


एवरग्रैंड का दिवालिया होना अब तय दिख रहा। ऐसे में चीन और हांगकांग की दूसरी रियल एस्टेट कंपनियां अब भारी दबाव में दिख रही है क्योंकि एवरग्रैंड का डूबना रियल एस्टेट मार्केट को सालों के लिए तगड़ा झटका देकर जाने वाला है।


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एवरग्रैंड को बचाने की कोशिश क्यों नहीं कर चीन?

एवरग्रैंड में करीब 2 लाख कर्मचारी काम करते हैं और यह कंपनी हर साल चीन में करीब 38 लाख रोजगार पैदा करती थी। चीन और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एवरग्रैंड की अहमियत को समझने के बावजूद चीनी सरकार ने अभी एवरग्रैंड को डूबने से बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।


चीन के सेंट्रल बैंक ने जरूर एवरग्रैंड के लोन को लेकर कुछ बैंकों से बात की है। एक ग्लोबल एनालिस्ट के मुताबिक एवरग्रैंड के डूबने से चीन की सरकार को किसी वित्तीय संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा, इसलिए शायग वह बेफ्रिक दिख रही है। हालांकि इसका जो असर होगा, वह लंबे तक चीन की अर्थव्यवस्था और उसकी कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग को प्रभावित करेगा। यह अंत में उसे ही नुकसान पहुंचाएगा। ग्लोबल एनालिस्ट ने कहा कि हालांकि इसके तत्कालिक झटके पूरी दुनिया के शेयर बाजार और रियल एस्टेड इंडस्ट्री पर दिख सकता है।


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