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सेबी ने पांच रेटिंग एजेंसियों पर बढ़ाया जांच का दायरा

फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
अपडेटेड Jul 22, 2019 पर 16:30  |  स्रोत : Moneycontrol.com

आईएलएफएस ग्रुप में फर्जीवाड़े की जांच पड़ताल कर रहे सेबी ने पांच क्रेडिट एजेंसियों के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ा दिया है। फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में कई खामियों का खुलासा हुआ है। इसके बाद सेबी ने अपना शिकंजा और कस दिया है।


सेबी को पता चला है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों और आईएलएफएस ग्रुप के बड़े अधिकारियों की मिलीभगत से 90 हजार करोड़ रुपये का भारीभरकम फर्जीवाड़ा हुआ है। फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक फाइनेंशियस स्थिति कमजोर होने के बावजूद बेहतर रेटिंग दी गई है। सेबी की दखल के बाद दो रेटिंग एजेंसियों के सीईओ को जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है। सेबी का कहना है कि हम सभी पांच एजेंसियों की जांच पड़ताल कर रहे हैं। साथ रेटिंग सिस्टम में जानबूझ कर गड़बडी करने वालों की भी जांच चल रही है।
दरअसल ग्रांट थॉर्नटन के विशेष ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि रेटिंग एजेंसी और आईएसएफएस के बड़े अधिकारियों के बीच ई-मेल से बातचीत होती थी। रेटिंग एजेंसी ने फाइनेशियल रूप से कमजोर कंपनियों के बेहतर रेटिंग दी है। इसके एवज में उन्हें महंगे उपहार और अन्य लाभ दिए जाते थे।


ग्रांट थॉर्नटन ने ऑडिट में बताया कि ग्रुप की कंपनियों को बेहतर रेटिंग के बलबूते बाजार में साख बनाए रखने और निवेशकों से पैसे लेने और कर्ज उठाने में सहूलियत मिलती रही। जुलाई-अगस्त 2018 में पहली बार ग्रुप की कंपनी आईटीएनएल के कॉमर्शियल पेपर के भुगतान में चूक के बाद रेटिंग घटाई। इस दौरान समूह ने क्रिसिल लिमिटेड, केयर रेटिंग्स, इक्रा, इंडिया रेटिंग्स (फिच समूह) और ब्रिकवर्क जैसी रेटिंग एजेंसियों की मदद ली थी।