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Indigo के दोनों फाउंडर्स में दरार, जानिए क्या है पूरा मामला?

प्रकाशित Thu, 16, 2019 पर 11:25  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जेट एयरवेज अभी मुश्किल से उबरी भी नहीं है कि बजट एयरलाइन इंडिगो की मुश्किलें शुरू हो गई हैं। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, इंडिगो के दोनों फाउंडर्स राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच मनमुटाव बढ़ गया है। मनमुटाव की खबर जब गुरुवार सुबह आई तो कंपनी के शेयरों में गिरावट शुरू हो गई। पिछले 12 महीनों में इंडिगो के शेयरों में 30 फीसदी की तेजी आ चुकी है। इस दौरान सेंसेक्स सिर्फ 5 फीसदी चढ़ा था।


जेट एयरवेज का कामकाज बंद होने का फायदा भी इंडिगो को मिला। लेकिन अब फाउंडर्स की लड़ाई के कारण निवेशक दूरी बना रहे हैं। यही वजह है कि गुरुवार सुबह इंडिगो के शेयर 7 फीसदी से ज्यादा गिरे। पिछले सात महीने में यह सबसे बड़ी गिरावट है। कंपनी के शेयर 1485.75 रुपए पर ट्रेड कर रहे हैं। पिछले 12 महीनों में कंपनी के शेयर 30 फीसदी चढ़े हैं. जबकि इस दौरान सेंसेक्स में सिर्फ 5 फीसदी की तेजी आई।


क्या है मामला?


राहुल भाटिया और राकेश अग्रवाल के बीच मतभेद की एयरलाइन से जुड़ी रणनीति और उसकी महत्वाकांक्षाओं को लेकर है। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट में कुछ ऐसी शर्त शामिल है जिसे लेकर दोनों फाउंडर्स में दरार पड़ गई है। हालांकि अभी यह पता नहीं चल पाया कि वह कौन सी खास शर्त है जिसकी वजह से दोनों के बीच बात बिगड़ी है। इस मामले में प्रमोटर्स ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। इंडिगो चलाने वाली कंपनी इंटरग्लोब एविएशन में राकेश गंगवाल के परिवार की कुल हिस्सेदारी 36.69 फीसदी और राहुल भाटिया के परिवार की कुल हिस्सेदारी 38.26 फीसदी है।


समझौते की कोशिश


दोनों फाउंडर्स अपने मतभेद मिटाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि एयरलाइन के कामकाज पर उसका असर ना पड़े। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक शख्स ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में मतभेद बढ़ा है। हालांकि लेकिन अभी इसके बारे में कुछ कहना बहुत जल्दाबाजी होगी कि मामला कोर्ट तक पहुंच सकता है। दोनों अपने मामले सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।


लीगल फर्म खेतान एंड कंपनी और जे सागर एसोसिएट्स फाउंडर्स के बीच मसला सुलझाने पर काम कर रहे हैं। गंगवाल और भाटिया इनके पुराने क्लाइंट हैं।
गंगवाल, यूनाइटेड एयरलाइंस और यूएस एयरवेज के साथ काम करते थे। इंडिगो शुरू करने के पीछे उनका ही आइडिया था।


बैलेंस ना बनाने से बिगड़ी बात?


इंडिगो के रिकॉर्ड प्लेन ऑर्डर के पीछ गंगवाल का दिमाग माना जाता है। वह देश में आक्रामक ढंग से कंपनी का विस्तार करना चाहते हैं। इस वजह से उन्होंने कंपनी के सीनियर मैनेजमेंट में कई बदलाव किए हैं।


गंगवाल अमेरिका के नागरिक हैं और वो पर्दे के पीछे से काम कर रहे हैं। इंडिया में कारोबार संभालने की जिम्मेदारी भाटिया की है। सूत्रों के मुताबिक, गंगवाल इंडिगो के बोर्ड में भी कोई जगह नहीं लेना चाहते। वह सिर्फ कंपनी के ग्रोथ और एक्सपैंशन पर फोकस करना चाहते हैं।


पहली बार मतभेद कब?


इंडिगो के दोनों फाउंडर गंगवाल और भाटिया के बीच मतभेद की शुरुआत दो साल पहले ही हो गई थी। गंगवाल जहां तेजी से कारोबार का विस्तार करना चाहते थे वहीं भाटिया सतर्कता भरे कदम उठाना चाहते थे।


पिछले साल फरवरी में गंगवाल ने ऐलान किया था कि फिस्कल ईयर 2019 में इंडिगो अपनी क्षमता में 52 फीसदी का इजाफा करेगी। यानी कंपनी के फ्लीट का साइज 155 से बढ़कर 250 हो जाता। उस वक्त मैनेजमेंट के ज्यादातर लोगों ने इसका विरोध किया था। इनमें कंपनी के प्रेसिडेंट आदित्य घोष भी शामिल थे। उस वक्त घोष ने कहा था कि क्षमता ज्यादा बढ़ने से मुश्किल हो सकती है। माना जाता है कि उस वक्त गंगवाल ने कहा था कि भारत की क्षमताओं को देखते हुए 500 से कम एयरक्राफ्ट्स को बहुत ज्यादा नहीं माना जा सकता। दिलचस्प है कि कंपनी के पास अभी 225 एयरक्राफ्ट हैं।


जेट एयरवेज और एयर इंडिया के मुश्किल में घिरने से इंडिगो के पास काफी संभावनाएं हैं। दोनों फाउंडर्स यह मानते हैं लेकिन दोनों में फर्क है इस बात को लेकर है कि इस मौके का फायदा कैसे उठाया जाए।


भाटिया चाहते हैं कि बड़े प्लेन के साथ इंडिगो की इंटरनेशनल ड्रीम को पूरा किया जा सके। वहीं गंगवाल बजट एयरलाइन साउथवेस्ट एयरलाइंस के मॉडल पर चलना चाहते हैं। साउथवेस्ट एयरलाइंस नैरो बॉडी बोइंग 737 के साथ ही ऑपरेशन करती है। इसका मतलब है कि कंपनी लंबे रूट पर नहीं जा सकती है। गंगवाल विदेशी एयरलाइन कंपनियों के साथ कोड शेयर एग्रीमेंट करना चाहते हैं। अभी तक इंडिगो बड़े प्लेन खरीदने की योजना को रोक कर रखा है। इसकी जगह तुर्की की एयरलाइन कंपनी के साथ कोडशेयर एग्रीमेंट जरूर हो चुका है।