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IndiGo में फर्जीवाड़ा तो नहीं हुआ! सेबी करेगा जांच

प्रकाशित Thu, 11, 2019 पर 12:15  |  स्रोत : Moneycontrol.com

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की पेरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के प्रमोटरों के बीच की जंग एयरलाइन पर भारी पड़ रही है। सरकार राकेश गंगवाल राहुल भाटिया के बीच शेयर होल्डिंग और उनके बीच बने एग्रीमेंट के बारे में जांच पड़ताल करेगी। साथ ही सेबी गंगवाल के लगाए गए आरोपों की भी जांच पड़ताल करेगा।


अगर सरकार की जांच में किसी तरह की गड़बड़ी पाई गई तो कंपनी पर भाटिया के कुछ खास अधिकारों को रद्द किया जा सकता है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक राकेश गंगवाल ने हाल ही में सरकार के सीनियर अफसरों से मुलाकात की थी।


कंपनी में शेयर होल्डर एग्रीमेंट में राहुल भाटिया को एयरलाइंस पर ज्यादा कंट्रोलिंग राइट्स दिए गए हैं। गंगवाल की इंडिगो की पेरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन में 37 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं राहुल भाटिया की 38 फीसदी हिस्सेदारी है। शेयर होल्डर्स एग्रीमेंट के कारण भाटिया को इंडिगो पर नियंत्रण के ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। जिसमें इंटरग्लोब एविएशन के 6 डायरेक्टर में से 3 को नियुक्त करना शामिल है। इसके अलावा चेयरमैन, सीईओ और प्रेसीडेंट को नॉमिनेट करना और नियुक्त करना शामिल है। इन दो प्रमोटर्स के बीच ऐसे कई मुद्दे बन गए हैं। इसमें खास बात ये है कि डायरेक्टर्स की नियुक्ति के मामले में आईजीई ग्रुप के साथ वोट करने के लिए गंगवाल और उनके सहयोगियों की जरूरत होती है।


जब भी प्रमोटर्स के बीच कोई शिकायत आती है तो सेबी और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत कंपनियों के रजिस्ट्रार जैसे रेग्युलेटरी को ध्यान देना पड़ता है।


गंगवाल ने सेबी को लिखी गई चिट्ठी में कहा है कि नवंबर में शेयर होल्डर के डील की समाप्ति के बाद वो अपने विशेषाधिकार बनाए रखना चाहते हैं। लिहाजा क्लॉज़ (धारा) में संशोधन करने का निर्देश दें।


आपको बता दें कि भाटिय ने पिछले महीने कंपनी के बोर्ड को लिखी चिट्ठी में कहा था कि गंगवाल ग्रुप शेयर होल्डिंग के एग्रीमेंट और कंपनी के ऑर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत अपने दायित्वों से खुद को भारमुक्त (रिलीव) देना चाहते थे, जो कि आईजी ग्रुप के नियंत्रित अधिकारों को लागू करता है। उसी चिट्ठी को 9 जुलाई को स्टॉक एक्सचेज के साथ शेयर किया गया था। गंगवाल द्वारा लगाए गए कुछ ट्राजेक्शंस को भी राहुल भाटिया ने खारिज कर दिया था।


इस बारे में कंपनी की प्रतिक्रिया जानने के लिए ई-मेल भी किया गया है। लेकिन अभी तक उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है।


उधर कॉरपोरेट कानून के जानकारों का कहना है कि, गवर्नेंस और शेयर होल्डिंग विवाद दोनों अलग-अलग हैं। अगर कोई शेयर होल्डर कंपनी में गवर्नेंस से संबंधित चिंताओं को उठाता है, तो सरकार या रेग्युलेटर्स (नियामक) कंपनी से जवाब तलब कर सकते हैं। हालांकि शेयरहोल्डर एग्रीमेंट पर विवादों को निपटाने के लिए शेयरहोल्डर को प्रॉपर जूडिशल फोरम (उचित न्यायिक मंच) पर संपर्क करना होगा।
फर्म कॉरपोरेट के संस्थापक पवन कुमार विजय ने कहा कि कंपनी अधिनियम के तहत मिसमैनेमेंट(खराब व्यवस्था) और उत्पीड़न से संबंधित विवादों का निपटारा NCLT में किया जा सकता है।


बड़े शेयर धारकों के साथ ऐसा करने से कंपनी को निर्णय लेने में देरी का सामना करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर इंडिगो इस समय संकट से गुजर रही है। कहीं इसका भी हाल जेट एयरवेज की तरह न हो जाए।


आपको बता दें कि इंडिगो की जगह क्षमता के विस्तार की योजना है। इसने पहले ही 5-6 सालों में अपने बेड़े में शामिल करने के लिए 430 ए 320 नियोस में से 70 से अधिक की डिलीवरी ले ली है। डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के एयर ट्रवेल मार्केट (हवाई यात्रा बाजार) में एयरलाइन की हिस्सेदारी 49 फीसदी है। स्पाइजेट 14.8 फीसदी की बाजार हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर है।