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Infosys के शेयर 16% गिरे, कंपनी के CEO पर लगे हैं गंभीर आरोप, जानें पूरा मामला

कंपनी के शेयरों में इतनी गिरावट छह सालों में पहली बार देखी गई है
अपडेटेड Oct 22, 2019 पर 16:48  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Infosys Shares। ग्लोबल सॉफ्टवेयर की दिग्गज कंपनी Infosys Ltd. के शेयर मंगलवार को 16% तक गिर गए। सोमवार को कंपनी के कुछ गुमनाम कर्मचारियों ने व्हिसलब्लोअर बनकर कंपनी के CEO सलिल पारेख और CFO निलंजन रॉय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। व्हिसलब्लोअर्स ने आरोप लगाया है कि ये शीर्ष अधिकारी पिछली कई तिमाहियों से शॉर्ट टर्म रेवेन्यू और प्रॉफिट में बूस्ट दिखाने के लिए गलत तरीके अपना रहे थे। कंपनी के शेयरों में इतनी गिरावट छह सालों में पहली बार देखी गई है।


इंफोसिस के शेयर 22 अक्टूबर को सुबह 10 बजे 15.99% तक गिरकर 645 रुपए प्रति शेयर आ गए। 9:40 पर कंपनी ने 14.25% की गिरावट के साथ 658.40 रुपए प्रति शेयर दिखाया। कंपनी ने इस गिरावट के चलते 2019 का अपना पूरा गेन खो दिया। वहीं कंपनी को मार्केट कैप में 42,000 करोड़ का नुकसान हुआ।


मंगलवार को तीन दिनों के बाद बाजार खुलने के बाद कंपनी के शेयर छह सालों के अपने न्यूनतम स्तर पर आ गए। अधिकतर ब्रोकरेज हाउसेज का कहना है कि इन आरोपों के चलते कंपनी में अनिश्चितता का माहौल बन सकता है और नियर टर्म में कंपनी के स्टॉक पर प्रेशर पड़ सकता है।


कंपनी के को-फाउंडर और चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने इन आरोपों पर मंगलवार को कहा कि इस पूरे मामले की गहरी जांच होगी। उन्होंने बताया कि ये आरोप कंपनी की ऑडिट कमिटी के पास पहुंच गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी तरह से स्वतंत्र और पारदर्शी हो इसके लिए दोनों अधिकारियों- CEO और CFO को इस मामले से अलग कर दिया गया है।


क्या है मामला?


कंपनी के कुछ गुमनाम कर्मचारियों ने "Ethical Employess" के नाम से 20 सितंबर को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को दो पेज का लेटर भेजा था, जो कि Deccan Chronical ने अपनी वेबसाइट पर छापा है। इस लेटर में लिखा है, "पारेख और रॉय पिछली कई तिमाहियों से कंपनी में कुछ गड़बड़ी कर रहे हैं। इसके सबूत में उनके ईमेल और वॉयस रिकॉर्डिंग भेजा जा रहा है।"


हालांकि इस लेटर का बोर्ड की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद एक गुमनाम व्हिसलब्लोअर ने एथिकल एंप्लॉयीज की तरफ से 3 अक्टूबर को अमेरिका के व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन प्रोग्राम को लेटर लिखकर बताया कि अप्रैल 2019 से सितंबर 2019 तिमाही तक इंफोसिस की बैलेंसशीट्स में अकाउंटिंग से जुड़ी गड़बड़ियां की गई हैं।


व्हिसलब्लोअर के लेटर में लिखा गया है, "पिछली तिमाही (जुलाई-सितंबर) में हमें कहा गया है कि वीजा कॉस्ट को पूरी तरह ना जोड़ा जाए ताकि कंपनी का प्रॉफिट बेहतर दिखे। हमने इस बातचीत की वॉइस रिकॉर्डिंग भी कर ली है। फिस्कल ईयर 2019-20 में तिमाही नतीजों के दौरान हमपर इस बात का दबाव बनाया गया था कि 5 करोड़ डॉलर के अपफ्रंट पेमेंट के लौटाने का जिक्र ना किया जाए। ऐसा होने से कंपनी का प्रॉफिट कम दिखेगा और इसका असर शेयर प्राइस पर पड़ेगा।"


"ऑडिटर्स और कंपनी के बोर्ड से अहम जानकारियां छिपाई गईं। वेरिजॉन, इंटेल और जापान में JV जैसे जो बड़े डील हुए हैं उनमें रेवेन्यू का मामला अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के मुताबिक नहीं था। कर्मचारियों को निर्देश दिया गया था कि वो ऑडिटर्स को बड़े डील की जानकारी ना दें। CEO रिव्यू और अप्रूवल्स की अनदेखी कर रहे हैं और उन्हें सेल्स टीम को निर्देश दे रहे हैं कि वो अप्रूवल के लिए मेल ना करें। वह उन्हें मार्जिन के लिए गलत अनुमान लगाने को कह रहे हैं।"


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