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नरेश गोयल की मनमर्जियों की वजह से डूबा जेट?

प्रकाशित Thu, 18, 2019 पर 12:37  |  स्रोत : Moneycontrol.com

जेट एयरवेज का कामकाज बंद हो चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर इस संकट की शुरुआत कब हुई। अगर हम पहले होने वाली घटनाओं को दोहराएं तो पता चलेगा कि इन सब की शुरुआत पिछली दिवाली से हुई थी।


तब नरेश गोयल अपने फाइनेंशियल एडवाइजर्स के साथ दीपक पारेख से सलाह लेने मुंबई के उनके घर पर गए थे। वह जानना चाहते थे कि जेट एयरवेज को कैसे बचाया जाए। तब टाटा ग्रुप संकट में घिरी जेट को खरीदना चाहता था। उस वक्त TPG कैपिटल की अगुवाई में एक प्राइवेट इक्विटी कंसोर्शियम भी दौड़ में था।


तब दीपक पारेख ने नेरश गोयल को यह सलाह दी थी कि वह पीछे हट जाएं और नए निवेशकों को मौका दें। पारेख अबू धाबी सरकार के मुख्य सलाहकार थे। दिलचस्प है कि यहीं की सरकारी एयरलाइन कंपनी एतिहाद जेट की पार्टनर थी।


सुनी सबकी की अपने मन की


नरेश गोयल की दोस्ती कई नेताओं, पॉलिसीमेकर्स, चीफ एग्जिक्यूटिव, एयरलाइन लीज पर देने वालों और मैन्युफैक्चर्स से हैं। उन्होंने सबकी बात सुनी लेकिन की अपने मन की। उन्होंने पद छोड़ने से मना कर दिया। गोयल को यह भरोसा था कि वह अपनी कंपनी बचा लेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अभी तक इस डील में रूचि ले रहे टाटा ग्रुप ने भी अपना हाथ पीछे खींच लिया।


ईटी के मुताबिक, एविएशन इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि गोयल ने एयरलाइन चलाने के लिए जिन लोगों को हायर किया था उनपर और भरोसा करना चाहिए था। उन्होंने कई गलतियां की हैं। उनके लिए कंपनी से निकलना मुश्किल फैसला था जिसकी वजह से हालात और खराब हुए हैं। यहां तक कि उनके पास टाटा ग्रुप जैसा इनवेस्टर निवेश के लिए तैयार था लेकिन गोयल किसी और को मौका देने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने जनवरी 2019 तक अपना पद जैसे-तैसे संभाल रखा था। लेकिन जेट एयरवेज का बुरा दौर शुरू हो चुका था।


जेट की नाकामी, फाउंडर की नाकामी


हाल के दिनों तक जेट एयरवेज को हर दिन 21 करोड़ का लॉस हो रहा था। इसके अलावा कंपनी पर कम से कम 1500 करोड़ रुपए का कर्ज था।


जेट की कामयाबी सीधे तौर पर प्रमोटर की नाकामी मानी जाएगी। कुछ कारोबार की नाकामी को प्रमोटर की नाकामी से अलग करके नहीं देखा जा सकता है। इंडस्ट्री के कई लोगों कहते थे कि गोयल का मानना है कि मैं ही जेट में हूं। जब लोग जेट की तरफ देखते हैं तो वो मेरी तरफ देखते हैं। गोयल अपनी वाकपटुता के लिए भी जाने जाते थे। लेकिन खुद की बात करते-करते उनकी सबसी बड़ी एसेट आज सबसे बड़ी लायबिलिटी बन गई है।


कंपनी के बोर्ड में एतिहाद के रहते हुए भी गोयल ने डेल्टा एयरलाइंस से खेलना नहीं छोड़ा। डेल्टा ने कंपनी में स्टेक लेने के लिए 300 रुपए प्रति शेयर का ऑफर दिया। उस वक्त नरेश गोयल 400 रुपए प्रति शेयर पर अड़े रहे। यह वो दौर था जब कंपनी के शेयर पिछले 6 महीनों में 182 रुपए से लेकर 347 रुपए के बीच ट्रेड कर रहे थे।  


2 मिस्टेक्स ऑफ गोयल


कई जानकारों का कहना है कि जेट की मु्श्किल तब से शुरू हुई जब गोयल ने 2007 में प्रतिद्वंदी कंपनी सहारा को 1450 करोड़ रुपए में खरीदा था। इस डील के साथ ही जेट फाइनेंशियल, लीगल और HR की कई मुश्किलों में फंस गई। गोयल ने एयर डक्कन, इंडिगो और स्पाइसजेट को टक्कर देने के लिए सहारा को खरीदा था। लेकिन यह रणनीति पूरी तरह उल्टी पड़ गई। साथ ही गोयल ने IPO का पैसा नए प्लेन ऑर्डर करने में खर्च कर दिया। इसके बाद छोटी-छोटे ब्रेकर भी जेट के लिए बड़े हो गए। इसके बाद 2012 में किंगफिशर बंद हो गया।


इसके बाद गोयल ने दूसरी गलती कर दी। उन्होंने 10 एयरबस A330 और बोइंग 777 प्लेन का ऑर्डर दे दिया। दो तरह के प्लेन खरीदकर जेट ने अपना खर्च बढ़ाने के अलावा कुछ नहीं किया। इसके साथ ही गोयल ने सीट भी कम रखी। ग्लोबल प्रैक्टिस में जहां 400 सीटें होती हैं वहां इसमें सिर्फ 308 सीटें थीं। यानी रेवेन्यू का एक चौथाई हिस्सा खुद खत्म कर लिया।


इसके ऊपर तुर्रा ये कि गोयल यह मानने को तैयार नहीं थे कि फ़र्स्टक्लास की 8 सीटों से कोई कमाई नहीं हो रही है। उस वक्त अधिकारियों ने इन सीटों को हटाने की सलाह दी लेकिन गोयल नहीं माने। यानी 250 किलो की एक-एक सीट का बोझ बिना किसी वजह एयरक्राफ्ट पर लदा था।  
 
लेंडर्स ने जब जेट को नीलाम करने की कोशिश की तो गोयल ने लंदन से बोली लगाई। लेकिन उनका ऑफर खारिज कर दिया गया। ऐसे कई मौकों पर एतिहाद और TPG ने धमकी दी कि अगर नरेश गोयल अपना हाथ नहीं खींचेंगे तो वो बाहर हो जाएंगे। ये दोनों कंपनियां बोली लगा सकती हैं।


नरेश गोयल ने जिन अधिकारियों को जेट एयरवेज चलाने के लिए नियुक्त किया था, उनपर कभी भरोसा नहीं किया। नरेश गोयल ने बिना किसी वजह के एयर सहारा खरीद लिया। नए महंगे एयरक्राफ्ट जोड़ लिए। गोयल आंत्रप्रेन्योर्स के लिए सबक हैं कि कोई भी फाउंडर अपनी कंपनी से बड़ा नहीं हो सकता।


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