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SAT के फैसले से क्या कार्वी ब्रोकिंग के निवेशकों का पैसा डूब जाएगा?

SAT ने निवेशकों की शेयर वापसी पर रोक लगा दी है, जिससे हजारों निवेशकों का पैसा डूब सकता है
अपडेटेड Dec 04, 2019 पर 08:41  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सिक्योरिटीज अपीलीय ट्राइब्यूनल (SAT) ने नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरीज (NSDL) को निर्देश दिया है कि कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग ने निवेशकों के जो शेयर गिरवी रखे हैं, फिलहाल उनके बैलेंस शेयरों का ट्रांसफर भी नहीं किया जाएगा।


इससे पहले SBI ने आदेश दिया था कि ब्रोकरेज हाउस ने अवैध तरीके से निवेशकों के जो शेयर गिरवी रखे हैं, उन्हें रिटर्न कर दिया जाए। लेकिन सेबी के इस फैसले के खिलाफ बजाज फाइनेंस ने चुनौती दी जिसके बाद SAT ने शेयरों के ट्रांसफर पर रोक लगा दी है।


ट्राइब्यूनल ने मार्केट रेगुलेटर को यह भी निर्देश दिया है कि वह 4 दिसंबर तक इस मामले की सुनवाई करे और 10 दिसंबर तक इस मामले में कोई ऑर्डर पास करे।


NSDL ने 2 दिसंबर को 83,000 ग्राहकों के 2,013.77 करोड़ रुपए के शेयर ट्रांसफर किए थे। कार्वी ब्रोकिंग के स्कैम में करीब 90,000 निवेशकों को चूना लगा है। बाकी बचे ज्यादातर अकाउंट का कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के साथ कुछ मतभेद चल रहा है। लिहाजा कार्वी का बकाया चुकाने के बाद बाकी निवेशकों के शेयर ट्रांसफर किए जाएंगे।


हालांकि अब SAT ने जो फैसला लिया है, उससे बाकी बचे निवेशकों की मुश्किल बढ़ गई है। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने मनीकंट्रोल को बताया, "बजाज फाइनेंस ने सेबी के जून के सर्कुलर के बाद 100 करोड़ रुपए का कर्ज दिया था।" सेबी का यह सर्कुलर क्लाइंट और प्रॉपराइटर अकाउंट को अलग करने के लिए था। इस सर्कुलर में साफ कहा गया था कि फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस गिरवी शेयरों के बदले लोन नहीं दे सकते हैं।


इसका मतलब है कि बजाज फाइनेंस के पास इस केस में कोई मजबूत मुद्दा नहीं है। एक दूसरे सोर्स ने कहा कि SAT के पास कोई नियम हटाने का अधिकार नहीं है। इसका अधिकार सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पास है।


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