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आपको नौकरी पर रखने का नियम बदल रहा है, जानिए क्या करेंगी अब कंपनियां

उम्मीद है कि संसद के शीत सत्र में यह बिल पेश किया जा सकता है, संसद से पास होने के बाद यह कानून बन जाएंगा
अपडेटेड Nov 22, 2019 पर 08:43  |  स्रोत : Moneycontrol.com

यूनियन कैबिनेट ने बुधवार को लेबर कोड ऑन इंडस्ट्रियल रिलेशन 2019 को मंजूरी दे दी। इसके बाद कंपनियां किसी भी खास अवधि के लिए फिक्सड टर्म पर कर्मचारियों को हायर कर सकती हैं। अगर किसी कंपनी में 100 या इससे ज्यादा कर्मचारी हैं तो छंटनी से पहले सरकार की इजाजत लेनी पड़ती है। नए कोड में 100 कर्मचारियों की सीमा बरकरार रखी है। लेकिन साथ में एक नया प्रोविजन जोड़ दिया गया है। इसके तहत कोई कंपनी नोटिफिकेशन के जरिए 100 कर्मचारियों की सीमा को घटा या बढ़ा सकती है।


फिक्स्ड टर्म एंप्लॉयमेंट का मतलब ऐसे कर्मचारियों से है जिन्हें किसी भी अवधि के लिए हायर किया जा सकता है। यह सीजन और ऑर्डर के आधार पर तीन महीने या छह महीने के लिए हो सकते हैं। 


उम्मीद है कि संसद के शीत सत्र में यह बिल पेश किया जा सकता है। कैबिनेट मीटिंग के बाद निर्मला सीतारमण ने कहा, "इसका मतलब यह है कि कर्मचारियों को सिर्फ 6 महीने के लिए भी हायर किया जा सकता है। इससे सभी कर्मचारियों को एकसमान अधिकार मिलेगा।"


सीतारमण ने कहा कि लेबर मिनिस्टर संतोष गंगवार ने कहा कि उन्होंने ट्रेड यूनियन के साथ बातचीत में काफी वक्त बिताया है। कोड मे दो सदस्यीय ट्राइब्यूनल बनाने का प्रावधान भी किया गया है। पहले इसमें एक सदस्यीय ट्राइब्यूनल था।


सरकार ने पिछले साल ही सभी सेक्टर के लिए फिक्स्ड टर्म एंप्लॉयमेंट की अनुमति दे दी थी। अभी इसे कोडीफाई किया गया है। इसका मतलब है कि संसद से इसे मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा।  


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