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सर्वना भवन के फाउंडर की कामयाबी से हत्यारा बनने की कहानी

प्रकाशित Thu, 11, 2019 पर 17:50  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सर्वना भवन! अगर आप कभी इस रेस्तरां चेन में गए हैं तो आपको साउथ इंडियन खाने का बेहतरीन स्वाद याद आ गया होगा। आप में से कई लोगों को यह बात पहले से पता होगी कि श्रवणा भवन के फाउंडर पर हत्या का आरोप है।


पी राजागोपाल की जिंदगी के दो अलग-अलग पहलू हैं। 1947 में जब देश आजाद हुआ था उसी साल राजागोपाल का जन्म तमिलनाडु के पुनईयाडी गांव में हुआ था। उनकी जिंदगी किसी फिल्म से कम नहीं है। राजागोपाल के पिता खेतिहर किसान थे और प्याज की खेती करते थे। लेकिन श्रवणा भवन शुरू करने के बाद राजागोपाल की जिंदगी पूरी तरह बदल गई।    


72 साल के राजागोपाल का नाम जुलाई 2019 में एकबार फिर चर्चा में आ गया। राजागोपाल को एक शख्स की हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। 10 साल पहले मद्रास हाई कोर्ट ने राजागोपाल के खिलाफ फैसला सुनाया था। राजागोपाल पर आरोप है कि एक महिला से शादी करने के लिए इन्होंने उसकी पति की हत्या करवा दी। वह महिला राजागोपाल के एक कर्मचारी की बेटी थी।


क्या से क्या हो गए राजागोपाल


राजागोपाल 1973 में चेन्नई चल गए। वहां उन्होंने एक किराना स्टोर शुरू किया। 1981 में उन्होंने शहर के केके नगर इलाके में एक छोटा सा होटल शुरू किया। कुछ ही साल में यह होटल ग्लोबल रेस्तरां चेन सर्वना भवन में बदल गया था। राजागोपाल नादर कम्युनिटी के थे। उन्होंने एक ऐसे सेक्टर में जगह बनाई जहां अपर क्लास का दबदबा था।


इलाके के लोग उन्हें प्यार से अनाची कहते थे। तमिल में बड़े भाई को अनाची कहते हैं। राजगोपाल आसपास के कामगारों के बीच काफी लोकप्रिय थे। वह उन्हें मुफ्त हेल्थकेयर, हाउसिंग स्टाइपेंड्स और लड़कियों की शादी के लिए पैसे मुहैया कराते थे।


राजागोपाल को अपनी जिंदगी रेस्तरां के काम के लिए काफी तारीफ मिली थी। 90 के दशक में यह रेस्तरां चेन चेन्नई में फैल गया। दो साल बाद राजागोपाल सिंगापुर गए। वहां उन्होंने अमेरिकी बर्गर चेन मैक्डोनाल्ड्स देखा। तब उन्हें इसी तरह का फूड चेन शुरू करने का खयाल आया।


सर्वना भवन का पहला इंटरनेशनल ब्रांच 2000 में दुबई में शुरू हुआ था। इसके बाद पेरिस, फ्रैंकफर्ट, लंदन और न्यूयॉर्क में इसके रेस्तरां खुला। आज देश में श्रवणा भवन के 39 और विदेश में 43 रेस्तरां है। इसके साथ ही 16 नए रेस्तरां खोलने की तैयारी है।


क्या है डाउनफॉल की कहानी


ऐसी कई खबरें आई हैं कि राजागोपाल के अपराध की वजह उनका एक ज्योतिष पर आंख मूंद कर भरोसा था। उस ज्योतिष ने ही राजागोपाल को तीसरी शादी करने की सलाह दी थी। ज्योतिष ने जिस लड़की से उन्हें शादी करने को कहा था वह राजागोपाल के ही एक कर्मचारी की बेटी थी। उस लड़की की शादी श्रवणा भवन में ही काम करने वाले एक दूसरे कर्मचारी प्रिंस संतकुमार के साथ हो गई थी।


राजागोपाल किसी भी सूरत में उस लड़की से शादी करना चाहते थे। राजागोपाल ने पहले संतकुमार का शोषण किया फिर 2001 में उसकी हत्या कर दी। संतकुमार को 1 अक्टूबर 2001 में अगवा किया गया था। राजागोपाल ने संतकुमार की गला दबाकर हत्या कर दी और कोडइकनाल के जंगलों में फेंक दिया। 31 अक्टूबर 2001 को फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अधिकारियों को संतकुमार की बॉडी मिली। 


2009 में मद्रास हाई कोर्ट ने राजागोपाल और उनके पांच सहयोगियों को 10 साल सश्रम कैद की सजा सुनाई थी। 2009 में राजागोपाल ने सरेंडर किया।


बाद में उनपर यह भी आरोप लगा कि जीवज्योति (जिससे शादी करने की कोशिश की थी) और उसके परिवार को घूस देने की कोशिश की थी ताकि मामले को टाला जा सके। हालांकि 10 साल बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की सजा बरकरार रखी है।