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लिस्टिंग के लिए LIC की ऑथराज्ड कैपिटल बढ़ाकर की जाएगी 25,000 करोड़ रुपये

LIC ने 1956 में 5 करोड़ रुपये की पूंजी के साथ कारोबार की शुरुआत की थी। मौजूदा समय में कंपनी के पास 31,96,214.81 करोड़ रुपये हैं
अपडेटेड Mar 08, 2021 पर 08:25  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अगले फाइनेंशियल ईयर में LIC की लिस्टिंग को आसान बनाने के लिए सरकार कंपनी की ऑथराइज्ड कैपिटल (authorised capital) बढ़ाकर 25,000 करोड़ रुपये करने की तैयारी में है। मौजूदा समय में कंपनी की पेड-अप कैपटिल (Paid-Up Capital -चुकता पूंजी) 29 करोड़ पॉलिसीज के साथ 100 करोड़ रुपये हैं। बता दें कि कंपनी ने 1956 में 5 करोड़ रुपये की पूंजी के साथ कारोबार की शुरुआत की थी। मौजूदा समय में कंपनी के पास 31,96,214.81 करोड़ रुपये हैं।


Life Insurance Corporation Act, 1956 में प्रस्तावित संशोधन के मुताबिक, LIC की ऑथराइज्ड कैपिटल शेयर 25,000 करोड़ रुपये होगी। जो 10 रुपये प्रति शेयर मूल्य के 25,00 करोड़ शेयर में बंटी होगी। फाइनेंस बिल 2021 (Finance Bill 2021) के तहत प्रस्तावित इस संशोधन के तहत बोर्ड भी बनाया जाएगा। जिनमें लिस्टिंग के नियमों का पालन करते हुए इंडिपेंडेंड डायरक्टरों ( independent directors) की नियुक्ति की जाएगी। 


LIC की लिस्टिंग के लिए Life Insurance Corporation Act, 1956 में 27  संशोधन किए जाने हैं। उनमें से एक संशोधन के मुताबिक, LIC के आने वाले IPO के बाद पहले 5 साल सरकार की हिस्सेदारी कम से कम 75 फीसदी होगी और लिस्टिंग के 5 साल पूरा होने के बाद सरकार अपनी हिस्सेदारी कम से कम 51 फीसदी पर लाएगी।


पिछले सोमवार को वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) ने कहा था कि LIC के प्रस्तावित IPO में 10 फीसदी हिस्सा पॉलिसी होल्डर्स के लिए रिजर्व होगा। उन्होंने आगे कहा था कि पॉलिसी होल्डर्स के हितों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार मेजोरिटी में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखेगी और मैनजेमेंट कंट्रोल अपने पास रखेगी।


बता दें कि बजट भाषण में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman)  ने भी कहा था कि 1 अप्रैल 2021 से शुरू होने वाले फाइनेंशियल ईयर में LIC का IPO आएगा। मौजूदा समय में LIC में सरकार की 100 फीसदी हिस्सेदारी है। शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद LIC 8-10 लाख करोड़ रुपये अनुमानित वैल्यूएशन (estimated valuation) के साथ मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) के लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी बन सकती है। 


सरकारी कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी का प्रबंधन करने वाली Department of Investment and Public Asset Management (DIPAM) ने पहले ही मिलीमैन एडवाइजर (Milliman Advisors) को LIC की embedded value वैल्यू के निर्धारण के लिए एक्चोरियल फर्म (actuarial firm) के तौर पर नियुक्त किया है। IPO के लिए Deloitte और SBI Caps  को pre-IPO एडवाइजर्स के तौर पर नियुक्त किया है।


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