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मलविंदर और शिविंदर सिंह ने लोगों के करोड़ों रुपए पर्सनल काम में लगाया: चार्जशीट

रेलिगेयर फिनवेस्ट का पैसा 19 कागजी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया, बिना लोन मांगे मिनटों में ट्रांसफर किया फंड
अपडेटेड Jan 23, 2020 पर 09:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

रेलिगेयर एंटरप्राइज (Religare Enterprises) के पूर्व प्रमोटर मलविंदर सिंह (Malvinder Singh) और शिविंदर सिंह (Shivinder Singh) ने लोगों के पैसे का इस्तेमाल अपने लिया किया। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, सिंह ब्रदर्स के खिलाफ दायर चार्जशीट में यह बताया गया है। इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) की
चार्जशीट के मुताबिक, "सिंह ब्रदर्स ने ग्रुप की कंपनी रेलिगेयर फिनवेस्ट (Religare Finvest) से लोगों का पैसा कागजी कंपनियों में ट्रांसफर किया। इस पैसे का इस्तेमाल अपने निजी कामों में लगाया।"


रेलिगेयर फिनवेस्ट, रेलिगेयर की लेंडिंग इकाई है जो कर्ज देती है। इस कंपनी के अधिकारियों ने प्रपोजल मिलने के दो घंटे के भीतर सैकड़ों करोड़ के अनसिक्योर्ड लोन कागजी कंपनियों को ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी। यहां तक कि जिन कंपनियों में यह फंड ट्रांसफर किया गया है, उन्होंने कंपनी से किसी कर्ज की मांग भी नहीं की थी। 


सिंह ब्रदर्स 2016 में रेलिगेयर फिनवेस्ट के बोर्ड में शामिल हुए थे। चार्जशीट में आरोप है कि कंपनी का पैसा 19 कागजी कपंनियों में ट्रांसफर करने की मंशा के साथ ही वह बोर्ड में शामिल हुए थे।


पिछले हफ्ते लोकल कोर्ट में सिंह ब्रदर्स के खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई थी। इसके मुताबिक, फंड ट्रांसफर करने के लिए सिर्फ कागजी कार्रवाई की गई थी। ये लोन अनसिक्योर्ड थे। यानी सिंह ब्रदर्स को फंड के बदले कोई एसेट्स या प्रॉपर्टी गिरवी नहीं रखनी पड़ी थी। चार्जशीट के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में सबसे खास यह था कि इन कागजी कंपनियों ने कभी लोन की मांग भी नहीं की थी। यहा तक कि इन कंपनियों को लोन मिनटों में पास कर दिया गया। 1 सितंबर 2016 को मोडलैंड वीयर्स प्राइवेट लिमिटेड (Modland Wears) को 3.14 मिनट पर 162 करोड़ रुपए के लोन का प्रस्ताव रखा गया था और 4.36 मिनट पर यह लोन पास कर दिय गया। यानी सिर्फ डेढ़ घंटे से भी कम समय में यह लोन पास हो गया। इसी दिन आर्टिफाइस प्रॉपर्टी प्राइवेट लिमिटेड (Artifice Property) को भी 165 करोड़ रुपए का लोन दिया गया।


इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, चार्जशीट में यह भी आरोप लगाया गया है कि 2014 में RBI ने जब रेलिगेयर फिनवेस्ट के कॉरपोरेट लोन बुक पर सवाल उठाने के बावजूद रीपेमेंट की क्षमता का आकलन नहीं किया गया। EOW का कहना है कि रेलिगेयर के प्रमोटर के तौर पर इन्हें सब जानते थे। इनके मौखिक संदेश पर भी ये लोन पास कर दिए गए थे।


EOW ने सिंह ब्रदर्स के अलावा रेलिगेयर के चेयरमैन सुनील गोधवानी के खिलाफ चार्जशीट दायर किया है। एजेंसी का कहना है, "लिस्टेड कंपनी होने के बावजूद लोन देने में किसी भी गवर्नेंस नियम का पालन नहीं किया गया था।"


EOW ने 19 कागजी कंपनियों के डायरेक्टर्स से भी पूछताछ की है। इनमें से 5 के डायरेक्टर सिर्फ नाम के हैं। ये सभी राधा स्वामी सत्संग ब्यास से जुड़े लोग हैं। सिंह ब्रदर्स के स्वर्गीय पिता परविंदर सिंह इससे जुड़े थे।


कागजी कंपनियों के डायरेक्टर्स का कहना है कि उनके घर पर पेपर लेकर कंपनी के लोग आए थे और उन्होंने उस पर साइन किया। साल के अंत में उन्हें एक तय रकम सैलरी के तौर पर मिलती थी। इन लोगों का कहना है कि उनमें से कभी किसी ने कंपनी के बैंक खातों से जुड़े पेपर पर साइन नहीं किया है।


क्या कहा है सिंह ब्रदर्स ने?


पूछताछ के दौरान मलविंदर सिंह ने EOW को बताया था, "सुनील गोधवानी और उनकी टीम रेलिगेयर फिनवेस्ट और इसकी सब्सिडियरीज का बिजनेस देखती थी। गोधवानी ही रेलिगेयर एंटरप्राइज, रेलिगेयर फिनवेस्ट और बाबाजी (राधा स्वामी सत्संग के चीफ गुरिंदर सिंह) के बीच पैसों के लेनदेन का काम देखती थी।"


हालांकि शिविंदर सिंह का कहना है कि 2016 में ही उन्होंने संन्यास ले लिया है। और राधा स्वामी सत्संग ब्यास से जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें रेलिगेयर और रेलिगेयर फिनवेस्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं है।


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